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बिहार में ‘SIR प्रक्रिया’ पर चुनाव आयोग का गैर-जिम्मेदाराना रवैया और मतदाता सूची शुद्धिकरण पर गंभीर प्रश्न

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में ‘SIR प्रक्रिया’ के संदर्भ में देश के नागरिकों से पाँच सवाल पूछे जाना एक अत्यंत गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना कदम है। आयोग ने यह बयान देकर मानो अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है कि अगर आपका उत्तर ‘हाँ’ है तो मतदाता सूची को शुद्ध करने में योगदान दें। मुख्य आपत्तियाँ: 1. निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह सटीक और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करे। अपनी विफलताओं को छिपाने हेतु जनता पर जिम्मेदारी डालना लोकतंत्र की आत्मा के विरुद्ध है। 2. संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार — मत देने का अधिकार चुनाव लड़ने का अधिकार — की अवमानना हो रही है। 3. आयोग यह स्पष्ट नहीं कर रहा कि जिन नागरिकों के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उनके पुनः नामांकन हेतु क्या पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। चुनाव आयोग कहाँ अपनी गलती छुपा रहा है? मतदाता सूची का समय पर अपडेट न करना। गलत तरीके से नाम हटाना या स्थानांतरित करना। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र को न मानना। जनता से जवाब माँगकर अपनी जिम्मेदारी का बोझ लोगों पर डालना। निर्वाचन कानून के ...

केंचुआ (केंद्रीय चुनाव आयोग) Vs ईवीएम इंजीनियर्स

केंचुआ (केंद्रीय चुनाव आयोग) Vs ईवीएम इंजीनियर्स प्रस्तुत आलेख में यह बताया है कि, किस तरह पेड मीडिया के प्रायोजकों ने केंचुआ (केंद्रीय चुनाव आयोग) का इस्तेमाल करके 24 वर्ष (1991-2014) तक दोषपूर्ण Evm से चुनाव कराए एवं कैसे केंचुआ 2018 से 2025 तक यानी आज भी कैसे फिर उसी तरीके का इस्तेमाल करने नागरिको को गच्चा दे रहा है। भारत में दोषपूर्ण Evm को जारी रखने के लिए पेड मीडिया के प्रायोजको ने एक गलत तर्क / प्रश्न की रचना की है - "जब चुनाव आयोग बुलाता है (Evm चेलेंज, हेकेथॉन आदि) तब Evm विरोधी क्यों नहीं जाते"। मूलत: यह लेख उपरोक्त प्रश्न का जवाब देता है। चेप्टर : 1 (1) 1991 में भारत में जब Evm आया तब कई इंजीनियर्स और इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले कार्यकर्ताओं ने कहा था कि- “जिस भी व्यक्ति के पास Evm का फ़िज़िकल एक्सेस(*) हो वह वोट चुरा सकता है।” (*) फ़िज़िकल एक्सेस मतलब, Evm को खोलने, उसमें प्रोग्राम डालने आदि की छूट। जो कि केंचुआ के आला अधिकारियों के पास होती है। (2) केंचुआ ने कहा- “फ़िज़िकल एक्सेस तो हम नहीं देंगे। तुम इसे हैक* करके दिखाओ” (*) हैकिंग मतलब, मशी...

ईवीएम विवाद–1991 से 2025 तक चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

ईवीएम विवाद–1991 से 2025 तक चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के उपयोग को लेकर गहरे सवाल उठ रहे हैं। प्रस्तुत तथ्य दर्शाते हैं कि 1991 से 2014 तक दोषपूर्ण ईवीएम का प्रयोग कराकर चुनाव कराए गए। इसके बाद 2010 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर VVPAT जोड़ी गई, किंतु 2018 के बाद से चुनाव आयोग ने मशीनों में “काले काँच” जैसी नई तकनीकी हेराफेरी कर दी, जिससे कागज़ी वोट भी चोरी होने का खतरा बना हुआ है। मुख्य बिंदु: 1. 1991 से इंजीनियरों ने चेताया था कि फिज़िकल एक्सेस रखने वाले अधिकारी मशीन से वोट चुरा सकते हैं। 2. चुनाव आयोग (CEC) ने हमेशा कहा – “मशीन नहीं देंगे, बिना छुए हैक करके दिखाओ”, जबकि असली खतरा इनसाइडर टेंपरिंग का था। 3. 2010 में हैदराबाद के इंजीनियर हरिप्रसाद ने वास्तविक ईवीएम में वोट चोरी साबित कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मशीनें सुरक्षित नहीं हैं। 4. 2018 में पारदर्शी काँच हटाकर काला काँच लगाया गया। इंजीनियर राहुल मेहता ने इसका भी डेमो जंतर मंतर पर दिखाया, जिसे करोड़ों लोगों ने देखा। 5. इसके बावजूद चुनाव आयोग ने अपनी मशीनें स्वतंत्र जांच के लिए...

श्रीराम सेंटर में विकास कुमार झा द्वारा लिखित एवं रमा पांडेय द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक "जमपुत्र" का मंचन*

*श्रीराम सेंटर में विकास कुमार झा द्वारा लिखित एवं रमा पांडेय द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक "जमपुत्र" का मंचन* *इस नाटक के माध्यम से ब्राह्मण और ब्राह्मण के बीच के अस्पृश्यता की रूढ़िवादी परंपरा को बड़े ही जीवंत तरीके से चित्रण किया गया* *दिनांक 29 अगस्त, 2025 को दिल्ली के श्रीराम सेंटर मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर में विकास कुमार झा द्वारा लिखित एवं रमा पांडेय द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक "जमपुत्र" का मंचन किया गया। मूल रूप से मैथिली में लिखित इस नाटक को हिंदी में प्रस्तुत किया गया। खास बात यह भी रही कि लगातार बारिश के बाबजूद भी दर्शक अंत तक उपस्थित रहे।* *प्रस्तुत नाटक में सास श्रीमती झा और उनकी बहू की नोंकझोंक, परंपरा, मिथिला की मधुश्रावणी पर्व एवं नृत्य, मिथिला के प्रसिद्ध कवि विद्यापति एवं सेवक उगना रूपी भगवान शंकर की कहानी, दान एवं दान की धारणा, समाज के बदलते स्वरूप, सामंतवाद, पंचायत, शहरी संस्कृति में नौकर की महत्ता, नए और पुराने जमाने की शैली व मानसिकता में अंतर, ब्राह्मण जाति के भीतर भी वर्गभेद को बख़ूबी रूप से द...

भारत के वर्तमान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के आय से अधिक संपत्ति के मामले की उच्चस्तरीय जांच हो: गोपाल प्रसाद खटीक (आरटीआई सेवक)

भारत के वर्तमान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 2019 में राज्यसभा के लिए नामित होते हैं। राज्यसभा सांसद बनने से पूर्व अटल बिहारी वाजपेई जी के प्रधानमंत्रित्व काल में IAS की नौकरी से VRS के बाद वे कंपनी के कहने पर भारत वापस आते हैं। उनके संबंध तथाकथित रूप से देश के सबसे बड़े खनन माफिया से होने के आरोप भी है। पार्लियामेंट्री एक्टिविटीज से पता चलता है कि अश्विनी वैष्णव उसी कंपनी के उसी सेक्टर में पैसा लगाते थे जिसमें आगे उन्हें कार्यभार मिलनेवाला था। उस कंपनी में उन्होंने मात्र एक लाख रुपए इन्वेस्टमेंट किया और बाद में उन्हें उस कंपनी के 113करोड़ रुपए के शेयर मिले। उस कंपनी के स्थापना के समय रेवेन्यू मात्र 45 लाख था जो 6 साल में बढ़कर 323 करोड़ से भी ज्यादा हो जाता है। उनके रेल मंत्री के कार्यकाल में रेल मंत्रालय काफी बुरे दौर से गुजरा है। कई रेल हादसों में कई लोग मरे, सर्वाधिक नुकसान हुआ , रेल के पटरी से उतरने की दुर्घटनाएं हुई, हालांकि कई रेल कर्मचारी अफसर निलंबित किए गए। ऐसा लगता है कि मंत्री महोदय ने जमकर भ्रष्टाचार किया है और अपने आय से अधिक संपत्ति को छुपाया है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच व...

Abbott India’s Negligence in Thyroid Medicine Endangers Patients’ Lives:Gopal Prasad RTI Activist

Abbott India’s Negligence in Thyroid Medicine Endangers Patients’ Lives Grave allegations have surfaced against Abbott India Limited, a subsidiary of US-based Abbott Laboratories (Chicago). In 2023, under the chairmanship of Munir Sheikh (49% stake), thyroid medicine of 88 mg strength was wrongly labeled as 25 mg. This error led to the circulation of millions of faulty tablets in the Indian market. As a result, numerous patients reported severe health complications, and at least two deaths have been confirmed. Experts warn that overdose of thyroid medicine can trigger heart attacks and other fatal conditions. Instead of addressing this grave lapse, the company merely published a small newspaper advertisement, failing to take responsibility or notify the public adequately. Public Demands: An independent, high-level investigation into the case. Fixing accountability for the deaths and deteriorating health of patients. Strict punitive action against Abbott India and responsible ...

मोदी जी के विदेश दौरों से अडानी को मिली विशेष सुविधाएँ? जनता जवाब चाहती है!

पत्रकार राजू परुलेकर जी ने गंभीर खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का इस्तेमाल सिर्फ़ कूटनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडानी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संविदाएँ और नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए किया गया। विपक्ष का सवाल साफ़ है— क्या प्रधानमंत्री कार्यालय जनता के टैक्स के पैसों से उद्योगपतियों की निजी लॉबिंग कर रहा है? क्यों हर विदेशी दौरे के बाद अडानी समूह को हवाई अड्डे, बिजली, बंदरगाह और रक्षा से जुड़े अनुबंध मिलते गए? क्या विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास अडानी के बिज़नेस एंजेंट की तरह काम कर रहे थे? जनता जानना चाहती है: 1. मोदी जी के साथ किन-किन विदेश दौरों पर अडानी समूह के प्रतिनिधि गए? 2. किन देशों में सरकारी स्तर की बातचीत के तुरंत बाद अडानी को ठेके/अनुबंध मिले? 3. क्या यह सत्ता और उद्योगपति के बीच मिलीभगत नहीं है? विपक्ष का वादा: हम इन सवालों को संसद से लेकर सड़क तक उठाएँगे और आरटीआई के माध्यम से भी सच्चाई जनता के सामने लाएँगे। प्रधानमंत्री जी को जवाब देना ही होगा।क्या वे देश के प्रधान सेवक हैं या सिर्फ़ चुनिंदा पूंजीपतियों...