बिहार में ‘SIR प्रक्रिया’ पर चुनाव आयोग का गैर-जिम्मेदाराना रवैया और मतदाता सूची शुद्धिकरण पर गंभीर प्रश्न
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में ‘SIR प्रक्रिया’ के संदर्भ में देश के नागरिकों से पाँच सवाल पूछे जाना एक अत्यंत गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना कदम है। आयोग ने यह बयान देकर मानो अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है कि अगर आपका उत्तर ‘हाँ’ है तो मतदाता सूची को शुद्ध करने में योगदान दें। मुख्य आपत्तियाँ: 1. निर्वाचन आयोग का दायित्व है कि वह सटीक और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करे। अपनी विफलताओं को छिपाने हेतु जनता पर जिम्मेदारी डालना लोकतंत्र की आत्मा के विरुद्ध है। 2. संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार — मत देने का अधिकार चुनाव लड़ने का अधिकार — की अवमानना हो रही है। 3. आयोग यह स्पष्ट नहीं कर रहा कि जिन नागरिकों के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उनके पुनः नामांकन हेतु क्या पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। चुनाव आयोग कहाँ अपनी गलती छुपा रहा है? मतदाता सूची का समय पर अपडेट न करना। गलत तरीके से नाम हटाना या स्थानांतरित करना। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र को न मानना। जनता से जवाब माँगकर अपनी जिम्मेदारी का बोझ लोगों पर डालना। निर्वाचन कानून के ...