मोदी जी के विदेश दौरों से अडानी को मिली विशेष सुविधाएँ? जनता जवाब चाहती है!

पत्रकार राजू परुलेकर जी ने गंभीर खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का इस्तेमाल सिर्फ़ कूटनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडानी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संविदाएँ और नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए किया गया। विपक्ष का सवाल साफ़ है— क्या प्रधानमंत्री कार्यालय जनता के टैक्स के पैसों से उद्योगपतियों की निजी लॉबिंग कर रहा है? क्यों हर विदेशी दौरे के बाद अडानी समूह को हवाई अड्डे, बिजली, बंदरगाह और रक्षा से जुड़े अनुबंध मिलते गए? क्या विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास अडानी के बिज़नेस एंजेंट की तरह काम कर रहे थे? जनता जानना चाहती है: 1. मोदी जी के साथ किन-किन विदेश दौरों पर अडानी समूह के प्रतिनिधि गए? 2. किन देशों में सरकारी स्तर की बातचीत के तुरंत बाद अडानी को ठेके/अनुबंध मिले? 3. क्या यह सत्ता और उद्योगपति के बीच मिलीभगत नहीं है? विपक्ष का वादा: हम इन सवालों को संसद से लेकर सड़क तक उठाएँगे और आरटीआई के माध्यम से भी सच्चाई जनता के सामने लाएँगे। प्रधानमंत्री जी को जवाब देना ही होगा।क्या वे देश के प्रधान सेवक हैं या सिर्फ़ चुनिंदा पूंजीपतियों के ग्लोबल एम्बेसडर? [गोपाल प्रसाद खटीक, आरटीआई सेवक ] [राष्ट्रीय सह संयोजक, भारत गठबंधन] [मोबाईल:9910341785,7678261884] [ईमेल: gopalrti7@gmail.com]

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