श्रीराम सेंटर में विकास कुमार झा द्वारा लिखित एवं रमा पांडेय द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक "जमपुत्र" का मंचन*
*श्रीराम सेंटर में विकास कुमार झा द्वारा लिखित एवं रमा पांडेय द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक "जमपुत्र" का मंचन* *इस नाटक के माध्यम से ब्राह्मण और ब्राह्मण के बीच के अस्पृश्यता की रूढ़िवादी परंपरा को बड़े ही जीवंत तरीके से चित्रण किया गया*
*दिनांक 29 अगस्त, 2025 को दिल्ली के श्रीराम सेंटर मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर में विकास कुमार झा द्वारा लिखित एवं रमा पांडेय द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक "जमपुत्र" का मंचन किया गया। मूल रूप से मैथिली में लिखित इस नाटक को हिंदी में प्रस्तुत किया गया। खास बात यह भी रही कि लगातार बारिश के बाबजूद भी दर्शक अंत तक उपस्थित रहे।*
*प्रस्तुत नाटक में सास श्रीमती झा और उनकी बहू की नोंकझोंक, परंपरा, मिथिला की मधुश्रावणी पर्व एवं नृत्य, मिथिला के प्रसिद्ध कवि विद्यापति एवं सेवक उगना रूपी भगवान शंकर की कहानी, दान एवं दान की धारणा, समाज के बदलते स्वरूप, सामंतवाद, पंचायत, शहरी संस्कृति में नौकर की महत्ता, नए और पुराने जमाने की शैली व मानसिकता में अंतर, ब्राह्मण जाति के भीतर भी वर्गभेद को बख़ूबी रूप से दर्शाया गया।*
*काम के बोझ से विचलित नौकर की आकांक्षी एक बहू मधुरिमा की पीड़ा, गांव से नौकर आ जाने पर खुशी तब दुःख और क्लेश में बदल जाता है, जब उसे पता चलता है कि उसका नौकर महापात्र ब्राह्मण का पुत्र है। अभी तक तो सवर्ण और दलित के बीच छुआछूत और वर्गभेद की बात ही सामने आती थी पर इस नाटक के माध्यम से ब्राह्मण और ब्राह्मण के बीच के अस्पृश्यता की परंपरा को बड़े ही जीवंत तरीके से चित्रण किया गया है।*
*सनातन धर्म की रूढ़िवादी परंपरा में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद तेरहवीं और श्राद्धकर्म संस्कार के उपरांत मृतक के परिवारजनों द्वारा जिस महापात्र ब्राह्मण को दान दिया जाता है उसे पीछे मुड़कर देखने की मनाही होती है। दुखद बात यह है कि इंटरनेट के इस युग में भी उस महापात्र ब्राह्मण के पैर में पीछे से जलती हुई लुकाठी फेंकी जाती है, जिसका विरोध महापात्र ब्राह्मण के पुत्र द्वारा किया जाता है। रंगकर्मियों द्वारा इस नाटक के माध्यम से समाज में व्याप्त इस कुप्रथा को खत्म करने का आह्वान किया गया और पूछा भी गया कि आखिर इसके लिए कौन है जिम्मेवार?*
*हिंदी नाटक "जमपुत्र" की निर्देशक रमा पाण्डेय जोधपुर राजस्थान की फिल्म और रंगमंच जगत की प्रख्यात हस्ताक्षर हैं। इसके साथ साथ वे लेखिका, सांस्कृतिक हस्ती और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वर्ष 1971 में भारत की भ्रमणशील राजदूत बनकर बहुत कम उम्र में ही देश का नाम रोशन किया है। रमा पाण्डेय ने वर्ष 1981 से 87 के दौरान लंदन स्थित बुश हाउस में बीबीसी हिंदी सेवा के साथ एक निर्माता के रूप में काम किया है एवं बीबीसी एशियन टेलीविजन के लिए नियमित रूप से योगदान भी दिया है। ऐसा लगता है कि रमा पाण्डेय जी ने जमपुत्र नाटक के माध्यम से सामाजिक क्रांति का शंखनाद कर दिया है।*
*जमपुत्र नाटक की निर्देशक रमा पाण्डेय जी कहती हैं कि झूठी और सड़ी परंपरा के कारण भारत के अठारह लाख बीस हजार महापात्र ब्राह्मण कीचड़ जैसी जिंदगी जीने को विवश है। समाज में उनका स्तर दलितों जैसी है।*
*"झूठी परंपरा का खेल है विचित्र"*
*"कौन है इंसान यहां पर,कौन है जमपुत्र"?*
*"बंधी हुई माला का टूट गया है सूत्र"*
*प्रस्तोता: गोपाल प्रसाद खटीक (आरटीआई सेवक/स्वतंत्र पत्रकार/सामाजिक चिंतक समालोचक)
मोबाईल नंबर: 9910341785,7678261884
ईमेल: gopalrti7@gmail.com*
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