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‘‘विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार तथा आजीविका मिशन कानून’’ सही मायनों में ‘‘मनरेगा’’ कानून की दिनदहाड़े हत्या है।

‘‘विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार तथा आजीविका मिशन कानून’’ सही मायनों में ‘‘मनरेगा’’ कानून की दिनदहाड़े हत्या है। ▪️ यह कानून करोड़ों-करोड़ों मजदूरों के हकों पर डाका है। ▪️ मेहनतकशों की रोजी-रोटी पर हमला है। ▪️ गरीबों के काम मांगने के अधिकार का हनन है। ▪️ मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात है। ▪️ एससी/एसटी/ओबीसी समाज के मनरेगा मजदूरों को सामाजिक न्याय से वंचित करने की साजिश है। ▪️ गोडसे के अनुयायियों द्वारा गांधी के दर्शन को खत्म करने की एक और साजिश है। ⬛ यह नया कानून तो पूरी तरह से करोड़ों मजदूरों और गरीबों के अधिकारों को खत्म करने के लिए 8 दुश्मनीपूर्ण हमले करता है। 1. रोजगार देने की जिम्मेवारी से मोदी सरकार ने पल्ला झाड़ाः ▪️. मनरेगा कानून में मजदूरी का सारा बजट केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था। ▪️. नए कानून में केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत बजट देगी और 40 प्रतिशत प्रांत की सरकार को देना पड़ेगा। ▪️. GST लगाने तथा केंद्रीय Cess से 5 लाख करोड़ सालाना वसूलने के बाद राज्यों के पास तो पैसा है ही नहीं। न राज्य पैसा दे पाएंगे, न करोड़ों मजदूरों को रोजगार मिलेगा। ...

एक देश आपदा आने से पहले तैयारी करता है। और हम? हम आपदा आने के बाद सोचते हैं।

एक देश आपदा आने से पहले तैयारी करता है। और हम? हम आपदा आने के बाद सोचते हैं। जापान जानता था कि समुद्र कभी भी तबाही ला सकता है। इसलिए उसने इंतजार नहीं किया। 400 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई और लाखों पेड़ लगाए, ताकि प्रकृति खुद इंसानों की रक्षा करे। हमारे यहां पहले जंगल कटते हैं, पहाड़ खोखले होते हैं, नदियों के रास्ते रोके जाते हैं। फिर बाढ़ आती है, ज़मीन धसती है, घर बह जाते हैं, और हम कहते हैं — “कुदरत का कहर।” सच यह है कि कुदरत नहीं, हमारी नासमझी भारी पड़ती है। पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं, वे ढाल, दीवार और जीवनरक्षक हैं। शायद अब भी वक्त है प्रकृति से लड़ने की बजाय प्रकृति के साथ चलना सीखने का। अगर आप भी मानते हैं कि “पेड़ बचेंगे, तो हम बचेंगे”, तो इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें। #Japan #India #Environment #SaveTrees #NatureProtection #FloodAwareness #DisasterPreparedness #ClimateAction #GreenIndia #ThinkBeforeItsLate #EarthCare #SustainableLiving #SaveNature #Awareness #EcoFriendly

क्या हम अनजाने में एक नए 'गुलाम युग' की ओर बढ़ रहे हैं?

क्या हम अनजाने में एक नए 'गुलाम युग' की ओर बढ़ रहे हैं? जागो युवा जगाओ भारत ​आज दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ आर्थिक और तकनीक की लड़ाई अब सीधे हमारे किचन के बजट और बच्चों की नौकरियों तक पहुँच गई है। यह पोस्ट शायद आपकी आँखें खोल देगी। ​2026: एक बड़ा बदलाव या एक बड़ा संकट? ​अमेरिका की 'मोनोपोली' और हम: पहली बार इतिहास में दुनिया का 55% कैश फ्लो सिर्फ एक देश (अमेरिका) से आ रहा है। वहां की 5 कंपनियां भारतीय शेयर बाजार से भी बड़ी हैं। हम सिर्फ उनकी तकनीक के 'यूजर' बनकर रह गए हैं, जिसके लिए हमें हर पल मोटी कीमत चुकानी पड़ रही है। ​सैलरी स्थिर, खर्चे डबल: हर 6-7 साल में रहने का खर्च (Cost of Living) दोगुना हो रहा है, लेकिन हमारी तनख्वाहें उस रफ़्तार से नहीं बढ़ रहीं। ​EMI का जाल: डाटा कहता है कि 40% भारतीयों की सैलरी सिर्फ EMI भरने में जा रही है। युवा अब कॉन्सर्ट जाने के लिए भी 'Buy Now Pay Later' (कर्ज) का सहारा ले रहे हैं। ​ क्यों भारत को बनाया जा रहा है 'निशाना'? ​चीन के पास 'Rare Earth' और मैन्युफैक्चरिंग का लेवरेज है, जिससे अमेरिका भी डरता ...

जब सत्ता की कुर्सी पर 'सौदागर' बैठेंगे, तो 'खेत' की बात कौन करेगा?

समाज का एक कड़वा नियम है— "व्यापारी और भिखारी को जगह से प्यार नहीं होता, उन्हें सिर्फ़ अपने 'मुनाफे' और 'भीख' से मतलब होता है।" एक जगह धंधा पिट गया? व्यापारी दुकान बदल लेगा। एक जगह भीख नहीं मिली? भिखारी चौराहा बदल लेगा। लेकिन किसान? किसान अपनी 'माँ' (ज़मीन) को छोड़कर कहाँ जाएगा? आज देश में जो किसानों के संघर्ष और आंदोलन हो रहे हैं, उनकी असली वजह नीतियों में नहीं, नीयतों में है। सत्ता का चरित्र-चित्रण: आज सत्ता के गलियारों में या तो वो लोग हैं जो राजनीति को 'व्यापार' समझते हैं (मुनाफा पहले), या वो जो सत्ता की 'भीख' पर पल रहे हैं। जब राजा ही 'व्यापारी' हो, तो वह खेत की हरियाली नहीं, ज़मीन की 'Market Value' देखेगा। उसे फसल के दाम से नहीं, ज़मीन के अधिग्रहण (Acquisition) से प्यार होगा। इसीलिये उन्हें किसान की चीख सुनाई नहीं देती, क्योंकि AC कमरों में मिट्टी की सौंधी खुशबू नहीं, नोटों की सरसराहट आती है। चौधरी चरण सिंह: एक उम्मीद जो मिसाल बन गई याद कीजिए चौधरी चरण सिंह जी को। जब एक 'किसान पुत्र' प्रधानमंत्री की कुर्सी ...

उत्तराखंड में आवाज़ दबाने की सरकारी कोशिश

“पहाड़ की शेरनी” के नाम से पहचानी जाने वाली ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को मुखानी थाने में दर्ज मुकदमे के बाद लगभग 8 घंटे की पूछताछ के उपरांत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया ! यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ज्योति अधिकारी अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय और 11 जनवरी के उत्तराखंड बंद को लेकर लगातार मुखर थीं ! इसे लेकर जनता में गहरी नाराज़गी और असंतोष देखा जा रहा है ! जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति द्वारा महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, तब सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई ! जब प्रणव चैंपियन द्वारा उत्तराखंड को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, तब कानून का डंडा क्यों नहीं चला ! और जब पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा सत्र के दौरान पहाड़ियों के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे, तब मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ ! जनता इसे दोहरे मापदंड और आवाज़ दबाने की कोशिश के रूप में देख रही है ! आज पहाड़ से मैदान तक एक ही स्वर उठ रहा है ! “हम ज्योति अधिकारी के साथ हैं !” #JyotiAdhikari #पहाड़कीशेरनी #StandWithJyoti #AnkitaBhat...

*वाराणसी जिला एवं उससे सटे इर्द गिर्द के जिलों (गाजीपुर , जौनपुर, मिर्जापुर, चंदौली, मछलीशहर) की जनता को जोड़ने हेतु हमारी योजना*

*वाराणसी जिला एवं उससे सटे इर्द गिर्द के जिलों (गाजीपुर , जौनपुर, मिर्जापुर, चंदौली, मछलीशहर) की जनता को जोड़ने हेतु हमारी योजना* *1. संपर्क, समन्वय, संवाद, सहयोग और सहकार के मूलमंत्र से क्रियान्वयन* *2.इस क्षेत्र की ऐतिहासिक, भौगोलिक,सामाजिक, राजनैतिक,सामाजिक स्थिति पर सर्वेक्षण रिपोर्ट* *3. इस क्षेत्र की जनता की मूलभूत आवश्यकता से संबंधित विभिन्न समस्याओं की सूची तैयार कर उसका समाधान ढूंढने का प्रयास करना। इस हेतु जन सेवा केंद्रों के सहयोग से सरकारी योजनाओं, विभागों की विभिन्न अनियमितता, भ्रष्टाचार के शिकायती पत्रों का संग्रह केंद्र का निर्धारण कर उन आवेदनों को संबंधित विभागों में अग्रसारित करने में सहयोग करना।* *4. इस क्षेत्र में केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं स्थानीय निकायों द्वारा संचालित योजनाओं की जमीनी जानकारी को जनता तक पहुंचाना तथा जो अभी तक लाभ से वंचित है विशेष रूप से उसके आवेदनों को अंतिम प्रक्रिया तक पहुंचाने हेतु जन सेवा केंद्रों का सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करना।* *5. सरकारी योजनाओं की सूची तैयार करना एवं योजनावार, लाभुकवार, योजनाओं में हुई अनियमिततावार जानकारी ...

नए साल का नया संकल्प: गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक

नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! नए साल में मैंने निम्नलिखित विषयों पर #चिंतन एवं #मंथन करने का संकल्प किया है: 1. देश में क्या -क्या ऐसे सुधार किए जाएं, जिससे जनता की मूलभूत समस्याओं का समय सीमा में त्वरित समाधान के साथ साथ शासन प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके । मेरे विचार से ये हैं _ #न्यायिकसुधार, #चुनावसुधार, #पुलिससुधार, #प्रशासनिकसुधार, #आर्थिकसुधार, #नीतिगतसुधार। 2. विकास के वर्तमान मानक के स्थान पर "#प्रकृतिकेंद्रितविकास" की अवधारणा पर कार्य करने हेतु प्रेरित करना। 3. देश के सम सामयिक मुद्दों पर लोकहित में सरकारी विभागों से #सूचनाकाअधिकार (#RTI) के द्वारा संबंधित सूचनाएं प्राप्त कर #मीडिया / #सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का प्रयास करना। 4. देश की #जनता को उसके #अधिकार और #कर्तव्य अर्थात जिम्मेदारी के बारे में प्रेरित करने हेतु #आरटीआई #प्रशिक्षणशिविर एवं #कार्यशाला आयोजित करने हेतु हरसंभव मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहित करना। 5. #किसान, #मजदूर, #दलित, #आदिवासी, #पिछड़े, #निर्बल , #महिला तथा किसी भी समाज के वास्तविक पीड़ितों के साथ हो रहे #शोषण,...