उत्तराखंड में आवाज़ दबाने की सरकारी कोशिश

“पहाड़ की शेरनी” के नाम से पहचानी जाने वाली ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को मुखानी थाने में दर्ज मुकदमे के बाद लगभग 8 घंटे की पूछताछ के उपरांत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया ! यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ज्योति अधिकारी अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय और 11 जनवरी के उत्तराखंड बंद को लेकर लगातार मुखर थीं ! इसे लेकर जनता में गहरी नाराज़गी और असंतोष देखा जा रहा है ! जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति द्वारा महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, तब सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई ! जब प्रणव चैंपियन द्वारा उत्तराखंड को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, तब कानून का डंडा क्यों नहीं चला ! और जब पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा सत्र के दौरान पहाड़ियों के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे, तब मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ ! जनता इसे दोहरे मापदंड और आवाज़ दबाने की कोशिश के रूप में देख रही है ! आज पहाड़ से मैदान तक एक ही स्वर उठ रहा है ! “हम ज्योति अधिकारी के साथ हैं !” #JyotiAdhikari #पहाड़कीशेरनी #StandWithJyoti #AnkitaBhattCase #JusticeForAnkita #उत्तराखंडबंद #UttarakhandBandh #VoiceOfPahad #SavePahad #StopTargetingActivists #SpeakForPahad #NoMoreSilence #PahadKiAwaaz #PahadiRights #devbhoomijustice

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