एक देश आपदा आने से पहले तैयारी करता है। और हम? हम आपदा आने के बाद सोचते हैं।
एक देश आपदा आने से पहले तैयारी करता है।
और हम? हम आपदा आने के बाद सोचते हैं।
जापान जानता था कि समुद्र कभी भी तबाही ला सकता है।
इसलिए उसने इंतजार नहीं किया।
400 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई और लाखों पेड़ लगाए,
ताकि प्रकृति खुद इंसानों की रक्षा करे।
हमारे यहां पहले जंगल कटते हैं,
पहाड़ खोखले होते हैं,
नदियों के रास्ते रोके जाते हैं।
फिर बाढ़ आती है, ज़मीन धसती है, घर बह जाते हैं,
और हम कहते हैं — “कुदरत का कहर।”
सच यह है कि कुदरत नहीं,
हमारी नासमझी भारी पड़ती है।
पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं,
वे ढाल, दीवार और जीवनरक्षक हैं।
शायद अब भी वक्त है
प्रकृति से लड़ने की बजाय
प्रकृति के साथ चलना सीखने का।
अगर आप भी मानते हैं कि
“पेड़ बचेंगे, तो हम बचेंगे”,
तो इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें।
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