संदेश

भारतीय दर्शन और दर्शन आधारित सोच तथा जीवन निम्नलिखित सूत्र वाक्यों में परिलक्षित होता है

भारतीय दर्शन और दर्शन आधारित सोच तथा जीवन निम्नलिखित सूत्र वाक्यों में परिलक्षित होता है: विद्या ददाति विनयम, विनयाद्याति पात्रताम,पात्रत्वा धनमापनोति, धनाधर्मः ततः सुखम। विद्या धन उद्यम बिना कहो जु पावै कौन, बिना डुलाए ना मिले ज्यों पंखे का पौन। परोपकार पूपन्याय पापाय पडपीड़नम अयं निज परोवेति गणना लघु चेतसाम उदारचरितनाम तु वसुधैव कुटुंबकम् । सेवा परमो धर्मः । ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण,जन्मना जायते शूद्र । यत्र नार्यस्तु पूज्यंते,रमंते तत्र देवता। सत्यम ब्रूयात प्रियम ब्रूयात, ना ब्रूयात असत्यम प्रियम। कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषू कदाचन प्रस्तोता: गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक दिल्ली/वाराणसी WhatsApp:8178949704 Mobile : 9910341785,7678261884 Email: sampoornkranti2025@gmail.com Twitter (X): @varanasilok2024 Blog : www.sampoorn-kranti.blogspot.com

सामाजिक न्याय (Social Justice) के महत्त्वपूर्ण पहलुओं को समझने की जरूरत: गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक

आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Freedom) और सामाजिक न्याय (Social Justice) के महत्त्वपूर्ण पहलुओं को समझने की जरूरत: गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक आर्थिक आज़ादी और सामाजिक न्याय: एक नई पहल आर्थिक आज़ादी का अर्थ केवल धन कमाना नहीं है; इसका अर्थ है हर नागरिक के पास एक गरिमामय जीवन जीने और राष्ट्र के विकास में योगदान करने का अवसर होना। यह स्क्रिप्ट उन सात महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित है, जो एक ऐसे समाज की नींव रख सकते हैं जहाँ समृद्धि, समानता और सुरक्षा हो। 1. समाज की ज़रूरत कैसे पूरी हो: आवश्यकता-आधारित नीतियाँ आज हमारी नीतियाँ अक्सर बाज़ार-प्रेरित होती हैं, जबकि उन्हें मानव-आवश्यकता-प्रेरित होना चाहिए। * स्थानीयकरण (Localization): समाज की ज़रूरतों को पूरा करने की शुरुआत स्थानीय स्तर पर होनी चाहिए। ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं को अपने क्षेत्र की पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा जैसी बुनियादी ज़रूरतों का आकलन करने और उन्हें पूरा करने के लिए सशक्त बनाया जाना चाहिए। * सामुदायिक संसाधन प्रबंधन: जल निकायों, सामुदायिक वनों और साझा भूमि का प्रबंधन स्थानीय समुदायों को सौंपना, ताकि संसाधनों क...

गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि हेतु नागरिक अधिकार और प्रशासनिक प्रतिबंध पर आपत्ति

दिनांक: 2 अक्टूबर 2025 सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन विषय: गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि हेतु नागरिक अधिकार और प्रशासनिक प्रतिबंध पर आपत्ति महोदय, वाराणसी के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ संस्था द्वारा स्थापित गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने हेतु समय एवं व्यक्तियों की संख्या को सीमित करने तथा आंबेडकर चौराहा स्थित आंबेडकर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने की अनुमति नहीं देने के कारण आपकी सरकार एवं आपके पुलिस प्रशासन के विरुद्ध निम्नलिखित रूप से अपना विरोध प्रकट करता हूं:- प्रमुख बिंदु: 1. नागरिक अधिकार का हनन – हर नागरिक को गांधी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का अधिकार है; अनुमति की शर्त लोकतंत्र के विपरीत है। 2. सर्व सेवा संघ पर बुलडोजर कार्रवाई – गांधी-विनोबा की ऐतिहासिक धरोहर को “रेलवे संपत्ति” बताकर ध्वस्त करना संस्कृति पर कुठाराघात है। 3. तानाशाही प्रवृत्ति – गांधी के विचारों का पालन करने के बजाय, उनके नाम और प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग हो रहा है। 4. प्रशासनिक विवेकहीनता – गांधी जयंती जैसे राष्ट्रीय पर्व पर श्...

Do the citizens of this country also need permission from the administration to offer floral tributes at Gandhi’s statue? : Gopal Prasad, RTI Sevak

Do the citizens of this country also need permission from the administration to offer floral tributes at Gandhi’s statue? : Gopal Prasad, RTI Sevak Varanasi, 2 October 2025 On the occasion of Gandhi–Shastri Jayanti, today, 2nd October 2025, I offered flowers at the statue of Mahatma Gandhi in the premises of Sarva Seva Sangh at Rajghat, Varanasi — the same place which was ruthlessly demolished by bulldozers under the Modi–Yogi government by falsely declaring it as Railway property, thereby destroying the sacred workplace of Gandhi and Vinoba. On Gandhi–Shastri Jayanti, it is the right of every citizen of the country to pay homage at the memorial site. However, unfortunately, the Varanasi district administration allowed only a few individuals to offer floral tributes, and that too for a limited time. Must the citizens of this country seek administrative permission even to offer flowers at Gandhi’s statue? We are not living in a democracy but under a dictatorial system. It is Modi’s...

क्या इस देश के नागरिक को गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए भी प्रशासन से इजाजत लेने की आवश्यकता है? : गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक

क्या इस देश के नागरिक को गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए भी प्रशासन से इजाजत लेने की आवश्यकता है? : गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक वाराणसी, 2 अक्टूबर 2025 गांधी शास्त्री जयंती के अवसर पर आज दिनांक 2 अक्टूबर 2025 को वाराणसी के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ के उस प्रांगण में गांधीजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया, जिसे मोदी योगी सरकार द्वारा तथाकथित रूप से रेलवे की संपत्ति बताकर गांधी विनोबा की कर्मभूमि को बुलडोजर से तहस नहस कर दिया गया। गांधी शास्त्री जयंती पर देश के समस्त नागरिक का अधिकार है कि वे उनके मूर्तिस्थल पर जाकर उन्हें नमन करे, परंतु वाराणसी जिला प्रशासन द्वारा दुर्भाग्यवश सीमित समय के लिए सीमित व्यक्तियों को ही पुष्पांजलि अर्पित करने का अवसर दिया गया। क्या इस देश के नागरिक को गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए भी प्रशासन से इजाजत लेने की आवश्यकता है? हम लोकतंत्र में नहीं बल्कि तानाशाही व्यवस्था में जी रहे हैं। मोदीजी की विवशता है कि वे गांधी और गांधी के चरखा का अपने राजनीतिक हित में प्रयोग तो करते हैं परंतु गांधी के सत्यमेव जयते, सत्य,अहिंस...

मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों एवं संघ की मर्यादा, नैतिकता, राजधर्म पर चिंतन हेतु संघ प्रमुख मोहन भागवत जी से मार्गदर्शन की अपेक्षा

---------- Forwarded message --------- From: Gopal Prasad Date: Fri, Sep 26, 2025, 11:10 PM Subject: मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों एवं संघ की मर्यादा, नैतिकता, राजधर्म पर चिंतन हेतु मार्गदर्शन की अपेक्षा To: Cc: दिनांक: 26 सितंबर 2025 सेवा में, श्री मोहन भागवत जी सर्वश्रेष्ठ संघ चालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गोलवलकर मार्ग, नागपुर, महाराष्ट्र विषय: मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों एवं संघ की मर्यादा, नैतिकता, राजधर्म पर चिंतन हेतु मार्गदर्शन की अपेक्षा। आदरणीय श्री मोहन भागवत जी, सादर प्रणाम। आपकी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति आपकी निष्कलंक निष्ठा के लिए मैं सदा आभारी हूं। आप हमेशा समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए अपने विचार और मार्गदर्शन प्रदान करते रहे हैं, यह हम सबके लिए एक प्रेरणा का स्रोत रहा है। आज मैं आपके समक्ष एक अत्यंत गंभीर विषय रख रहा हूं, जो वर्तमान में हमारे देश की राजनीति और शासन प्रणाली के भविष्य को लेकर उत्पन्न चिंताओं से जुड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्ट...

बिहार में 1050 एकड़ भूमि मात्र ₹1 पर अडानी समूह को लीज पर देने की प्रक्रिया में मोदी सरकार द्वारा की गई जनहित की घोर उपेक्षा

______प्रेस विज्ञप्ति______ बिहार में 1050 एकड़ भूमि मात्र ₹1 पर अडानी समूह को लीज पर देने की प्रक्रिया में मोदी सरकार द्वारा की गई जनहित की घोर उपेक्षा भारत गठबंधन के राष्ट्रीय सह-संयोजक एवं आरटीआई सेवक गोपाल प्रसाद खटीक ने कहा “देश जानना चाहता है कि मोदी सरकार जनहित के बजाय अडानीहित को क्यों प्राथमिकता दे रही है? प्रधानमंत्री पद की शपथ में संविधान और राजधर्म का पालन करने का वचन दिया गया था, किंतु मोदीजी ने शपथ की गरिमा का घोर उल्लंघन किया है। उनका चाल, चरित्र और चेहरा अब पूरी तरह उजागर हो चुका है।” गोपाल प्रसाद खटीक ने महामहिम राष्ट्रपति और माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अपील की है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी गंभीर आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशहित के लिए नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडानी के हित साधने के लिए प्रधानमंत्री बने हैं। बिहार सरकार ने अडानी समूह को 1050 एकड़ भूमि मात्र ₹1 पर 33 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराई ...