भारतीय दर्शन और दर्शन आधारित सोच तथा जीवन निम्नलिखित सूत्र वाक्यों में परिलक्षित होता है
भारतीय दर्शन और दर्शन आधारित सोच तथा जीवन
निम्नलिखित सूत्र वाक्यों में परिलक्षित होता है:
विद्या ददाति विनयम, विनयाद्याति पात्रताम,पात्रत्वा धनमापनोति, धनाधर्मः ततः सुखम।
विद्या धन उद्यम बिना कहो जु पावै कौन,
बिना डुलाए ना मिले ज्यों पंखे का पौन।
परोपकार पूपन्याय पापाय पडपीड़नम
अयं निज परोवेति गणना लघु चेतसाम
उदारचरितनाम तु वसुधैव कुटुंबकम् ।
सेवा परमो धर्मः ।
ब्रह्म जानाति इति ब्राह्मण,जन्मना जायते शूद्र ।
यत्र नार्यस्तु पूज्यंते,रमंते तत्र देवता।
सत्यम ब्रूयात प्रियम ब्रूयात, ना ब्रूयात असत्यम प्रियम।
कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषू कदाचन
प्रस्तोता: गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक दिल्ली/वाराणसी
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