बिहार में 1050 एकड़ भूमि मात्र ₹1 पर अडानी समूह को लीज पर देने की प्रक्रिया में मोदी सरकार द्वारा की गई जनहित की घोर उपेक्षा
______प्रेस विज्ञप्ति______
बिहार में 1050 एकड़ भूमि मात्र ₹1 पर अडानी समूह को लीज पर देने की प्रक्रिया में मोदी सरकार द्वारा की गई जनहित की घोर उपेक्षा
भारत गठबंधन के राष्ट्रीय सह-संयोजक एवं आरटीआई सेवक गोपाल प्रसाद खटीक ने कहा “देश जानना चाहता है कि मोदी सरकार जनहित के बजाय अडानीहित को क्यों प्राथमिकता दे रही है? प्रधानमंत्री पद की शपथ में संविधान और राजधर्म का पालन करने का वचन दिया गया था, किंतु मोदीजी ने शपथ की गरिमा का घोर उल्लंघन किया है। उनका चाल, चरित्र और चेहरा अब पूरी तरह उजागर हो चुका है।” गोपाल प्रसाद खटीक ने महामहिम राष्ट्रपति और माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अपील की है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी गंभीर आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशहित के लिए नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडानी के हित साधने के लिए प्रधानमंत्री बने हैं। बिहार सरकार ने अडानी समूह को 1050 एकड़ भूमि मात्र ₹1 पर 33 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराई है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इस भूमि को कागज़ों में बंजर दर्शाया गया, जबकि वास्तव में यहां 10 लाख फलदार (आम) पेड़ लगे हुए हैं। एक ओर प्रधानमंत्री मोदी “एक पेड़-माँ के नाम” जैसी पहल चलाते हैं, वहीं दूसरी ओर 10 लाख पेड़ों की बलि अपने उद्योगपति मित्र को लाभ पहुँचाने के लिए दी जा रही है। और भी चिंताजनक यह है कि यहां स्थापित होने वाले पावर प्लांट से जो भी बिजली उत्पन्न होगी, वह सरकार को 25 वर्षों तक ₹7 प्रति यूनिट की दर से ख़रीदनी होगी। इसका सीधा बोझ जनता की जेब पर पड़ेगा जबकि लाभ केवल अडानी समूह को होगा।
जारीकर्ता: गोपाल प्रसाद
(आरटीआई कार्यकर्ता व समाजसेवी)राष्ट्रीय सह संयोजक, भारत गठबंधन
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