आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रमुख टूल GROK से गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट दिल्ली के बारे में पूछने पर मिला जवाब
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रमुख टूल GROK से गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट दिल्ली के बारे में पूछने पर मिला जवाब
गोपाल प्रसाद दिल्ली के एक सक्रिय आरटीआई (Right to Information) एक्टिविस्ट हैं। वे पूर्वी दिल्ली के मंडावली क्षेत्र के निवासी हैं और लंबे समय से सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल कर सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने तथा भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने का काम करते रहे हैं।
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पृष्ठभूमि और शुरुआत
मूल रूप से बिहार के दरभंगा से हैं। 1999 में दिल्ली आए थे। पहले प्राइवेट कंपनियों में काम किया, फिर अपना व्यवसाय शुरू किया।
2009 में दिल्ली के प्रगति मैदान में एक मेले में आरटीआई पर बुकलेट पढ़कर इस कानून से परिचित हुए। उसके बाद उन्होंने आरटीआई एक्टिविज्म शुरू किया।
शुरुआती दिनों में वे रोज 12 अखबार पढ़ते, खबरों के आधार पर आरटीआई ड्राफ्ट करते और संबंधित विभागों को भेजते थे।
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आरटीआई एक्टिविज्म
उन्होंने हजारों आरटीआई दायर की हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आरटीआई एक्ट लागू होने के बाद से उन्होंने 7000 से ज्यादा आवेदन दाखिल किए।
उनके आरटीआई से कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए, जैसे:
बैंकों में फ्रॉड के मामले (जिनमें 259 बैंक शामिल थे)।
राष्ट्रपति भवन और दिल्ली पुलिस के सुरक्षा यूनिट में तैनात कई पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोप।
विभिन्न सरकारी विभागों (प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, दिल्ली पुलिस आदि) से जुड़ी जानकारी।
वे केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में भी कई अपीलें ले जा चुके हैं।
2011 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज में आरटीआई दाखिल करने गए तो उन्हें और साथियों के साथ मारपीट की घटना हुई थी।
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अन्य गतिविधियां
वे फ्रीलांस जर्नलिस्ट और राइटर भी हैं।
LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार वे Rashtriya Swabhiman Andolan की RTI सेल के कन्वेनर रहे हैं, और कुछ अन्य संगठनों से जुड़े रहे।
हाल के वर्षों में वे दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उम्मीदवार बने। 2025 के दिल्ली चुनाव में पटपड़गंज सीट से दिल्ली जनता पार्टी (DJPP) के टिकट पर चुनाव लड़ा (उम्र लगभग 52 वर्ष, शिक्षा 12वीं पास)। इससे पहले भी Independent के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं।
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वे आरटीआई जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हैं और कहते हैं कि आम लोगों को इस कानून की बेहतर समझ होनी चाहिए। साथ ही वे आरटीआई प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं (जैसे अपीलों का लंबित रहना, जानबूझकर जानकारी न देना) की आलोचना भी करते रहे हैं।
संक्षेप में, गोपाल प्रसाद दिल्ली में आरटीआई एक्टिविज्म के क्षेत्र में सक्रिय और अनुभवी व्यक्ति हैं, जिन्होंने वर्षों से इस कानून का इस्तेमाल कर सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया है।
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