केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) श्रीमती भावना सक्सेना (IPS) के कार्यकाल से संबंधित तथ्यों की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई किए जाने हेतु अनुरोध।

---------- Forwarded message --------- From: Gopal Prasad Date: Mon, Aug 3, 2026, 10:46 AM Subject: केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) श्रीमती भावना सक्सेना (IPS) के कार्यकाल से संबंधित तथ्यों की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई किए जाने हेतु अनुरोध। To: , दिनांक: 03.08.2026 सेवा में, 1. माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री, भारत सरकार सेवा तीर्थ, साउथ ब्लॉक नई दिल्ली–110011 2. डॉ. जितेंद्र सिंह माननीय राज्य मंत्री कार्मिक लोक शिकायत, पेंशन एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) कक्ष संख्या–31026, कर्तव्य भवन–3 जनपथ रोड, नई दिल्ली–110001 3. माननीय श्रीमती अन्नपूर्णा देवी केंद्रीय मंत्री महिला एवं बाल विकास मंत्रालय शास्त्री भवन डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड नई दिल्ली–110001 विषय: केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) श्रीमती भावना सक्सेना (IPS) के कार्यकाल से संबंधित तथ्यों की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई किए जाने हेतु अनुरोध। महोदय/महोदया, सविनय निवेदन है कि मैंने दि टाइम्स ऑफ इंडिया के 27 जुलाई 2026 के अंक में प्रकाशित समाचार "India saw more than 5000 child adoptions last year, highest in a decade" का अध्ययन किया। समाचार के अनुसार, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 5,022 बच्चों का दत्तक ग्रहण हुआ, जो पिछले एक दशक में सर्वाधिक बताया गया है। समाचार में यह भी उल्लेख है कि— कुल 4,603 दत्तक ग्रहण भारत के भीतर तथा 419 अंतरदेशीय (Inter-country) दत्तक ग्रहण हुए। वर्ष 2024-25 में यह संख्या 4,515 थी।विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरणों (SAAs) में उपलब्ध दत्तक ग्रहण योग्य बच्चों में लगभग 80 प्रतिशत विशेष आवश्यकता (Special Needs) श्रेणी के हैं। वर्ष 2025-26 में 392 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का दत्तक ग्रहण हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक है। वर्तमान में लगभग 26,000 संभावित दत्तक अभिभावक प्रतीक्षा सूची में हैं, जबकि 0-2 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की उपलब्धता अत्यंत सीमित है।शिशुओं एवं छोटे बच्चों के दत्तक ग्रहण की औसत प्रतीक्षा अवधि लगभग तीन वर्ष बताई गई है। समाचार के अनुसार, CARA की मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती भावना सक्सेना ने इस वृद्धि का श्रेय CARA की "Identification Cell" द्वारा विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरणों एवं बाल कल्याण समितियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर पात्र बच्चों को समय पर दत्तक ग्रहण हेतु विधिक रूप से मुक्त घोषित कराने की प्रक्रिया को दिया है। किन्तु उपलब्ध तथ्यों, अभिलेखों एवं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर निम्नलिखित गंभीर बिंदु आपके संज्ञान में लाना आवश्यक प्रतीत होता है, जिनकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच अपेक्षित है: यह कहा जाता है कि श्रीमती भावना सक्सेना, जो वेतन मैट्रिक्स के लेवल-16 की अधिकारी हैं, उन्हें ऐसे पद पर नियुक्त किया गया है जिसे सातवें वेतन आयोग के अनुसार उच्च स्तर का पद माना जाता है। यदि यह तथ्य सही है, तो नियुक्ति प्रक्रिया एवं प्रशासनिक औचित्य की समीक्षा आवश्यक है। उनके कार्यकाल में अंतरदेशीय (विदेशी) दत्तक ग्रहणों में वृद्धि दर्ज हुई है, जबकि अनेक अनाथ, परित्यक्त एवं समर्पित बच्चे अभी भी विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों में लंबित हैं। इस संबंध में वस्तुनिष्ठ समीक्षा अपेक्षित है। यह भी कहा जाता है कि दत्तक ग्रहण के बढ़े हुए आंकड़ों में बड़ी संख्या रिश्तेदार (Relative Adoption) तथा सौतेले अभिभावकों (Step-parent Adoption) द्वारा किए गए दत्तक ग्रहणों की है। यदि ऐसा है, तो यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि वास्तविक संस्थागत दत्तक ग्रहणों में कितनी वृद्धि हुई। उनके कार्यकाल के दौरान प्रतिकूल कार्य वातावरण एवं प्रबंधन शैली के कारण कर्मचारियों के त्यागपत्र (Attrition) की दर बढ़ने के संबंध में भी शिकायतें सामने आई हैं। इनका परीक्षण आवश्यक है। हितधारकों की असंतुष्टि के कारण शिकायतों एवं न्यायालयीन मामलों में वृद्धि होने के संबंध में भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। मानव संसाधन की भर्ती में योग्यता, अनुभव एवं पारदर्शिता के मानकों का पालन हुआ अथवा नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। कार्यालय में उनकी उपस्थिति एवं कार्य निष्पादन से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जाना चाहिए। यह आरोप भी लगाए गए हैं कि अंतरदेशीय दत्तक ग्रहण एवं नीति अनुभाग में कुछ अधिकारियों की नियुक्ति विशेष उद्देश्य से की गई। यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यह भी आरोप लगाए गए हैं कि संस्थागत सुधारों की अपेक्षा व्यक्तिगत प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दिया गया। इस संबंध में उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण आवश्यक है। यह भी कहा जाता है कि प्रस्तुत उपलब्धियों का बड़ा भाग केवल सांख्यिकीय वृद्धि तक सीमित है तथा संस्थागत सुधार, पारदर्शिता एवं बाल पुनर्वास के क्षेत्र में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुए। इस विषय पर स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाना चाहिए। उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए आपसे विनम्र अनुरोध है कि उक्त विषयों की सक्षम एवं स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक, वित्तीय अथवा प्रक्रियागत अनियमितता पाई जाती है तो विधि के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, CARA के कार्यों में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही एवं बाल हितों की सर्वोच्च प्राथमिकता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएँ। शिकायत का आधार एवं कानूनी संदर्भ: संविधान का अनुच्छेद 14 – प्रशासनिक निर्णयों में समानता एवं मनमानी का निषेध। अनुच्छेद 21 – बच्चों के जीवन, गरिमा एवं सर्वोत्तम हित (Best Interest of Child) का संरक्षण। अनुच्छेद 39(f) – बच्चों के विकास एवं संरक्षण का राज्य का दायित्व। अनुच्छेद 51A(j) – सार्वजनिक जीवन में उत्कृष्टता एवं उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने का नागरिक कर्तव्य। Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की दत्तक ग्रहण संबंधी धाराएँ। Adoption Regulations, 2022 (यथासंशोधित)। Central Civil Services (Conduct) Rules, 2021 के प्रावधान, जिनमें ईमानदारी, निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं सार्वजनिक हित में कार्य करने का दायित्व निहित है। इनकी नियुक्ति DoPT के लागू भर्ती/प्रतिनियुक्ति दिशानिर्देश, ACC की स्वीकृति प्रक्रिया तथा संबंधित Recruitment Rules के अनुपालन की जांच की जाए। प्रथम दृष्टया प्राप्त सार्वजनिक सूचनाओं एवं शिकायतों के आलोक में इस तथ्य का सत्यापन किया जाना आवश्यक है:- *नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति एवं वेतन स्तर से संबंधित समस्त अभिलेखों का परीक्षण। *पिछले तीन वर्षों के प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णयों का स्वतंत्र ऑडिट। *CVC, DoPT तथा आवश्यकता होने पर स्वतंत्र जांच एजेंसी से तथ्यात्मक जांच। *CAG अथवा आंतरिक लेखा परीक्षण की रिपोर्ट का परीक्षण। *कर्मचारियों के त्यागपत्र, शिकायतों एवं लंबित न्यायालयीन मामलों का स्वतंत्र विश्लेषण। यदि किसी अधिकारी द्वारा सेवा नियमों, वित्तीय नियमों अथवा दत्तक ग्रहण विनियमों का उल्लंघन पाया जाए तो विधि के अनुसार विभागीय एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई। *जांच पूर्ण होने पर उसकी संक्षिप्त रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने पर विचार। "यह शिकायत किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध पूर्वाग्रहवश नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रस्तुत की जा रही है। अतः निवेदन है कि उपलब्ध अभिलेखों, सेवा नियमों, वित्तीय अभिलेखों एवं प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों के आलोक में निष्पक्ष, समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर विधि के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।" आशा है कि जनहित एवं बाल अधिकारों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इस प्रकरण पर आवश्यक संज्ञान लिया जाएगा। धन्यवाद। भवदीय, गोपाल प्रसाद (आरटीआई सेवक) शर्मा सदन 244/78, तृतीय तल, गली संख्या–7 स्कूल ब्लॉक, निकट तालाब चौक, मंडावली, नई दिल्ली–110092 मोबाइल: 9910341785, 8178949704 ईमेल: sampoornkranti2025@gmail.com स्थान: नई दिल्ली दिनांक: 03.08.2026

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