मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि त्याग, ममता, करुणा, संरक्षण और जीवन-संस्कारों की जीवंत प्रतिमूर्ति है

मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि त्याग, ममता, करुणा, संरक्षण और जीवन-संस्कारों की जीवंत प्रतिमूर्ति है। भारतीय संस्कृति में मां का स्थान सर्वोच्च माना गया है। हमारे यहां मातृत्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि प्रत्येक दिन श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का विषय है। आज जिस प्रकार “मदर्स डे” को व्यापक रूप से मनाया जाता है, वह पाश्चात्य परंपरा का प्रभाव अवश्य हो सकता है, किंतु भारतीय संस्कृति में तो “मातृ देवो भव” का संदेश प्राचीन काल से ही हमारे जीवन मूल्यों का अभिन्न अंग रहा है। नवरात्रि में हम मातृशक्ति की आराधना करते हैं तथा “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” का उद्घोष हमारी सांस्कृतिक चेतना को प्रतिबिंबित करता है। “मां” शब्द सुनते ही वात्सल्य, संवेदना, सुरक्षा, पालन-पोषण, त्याग और निस्वार्थ प्रेम का भाव स्वतः मन में जागृत हो उठता है। भारतीय चिंतन में केवल जन्म देने वाली माता ही नहीं, बल्कि धरती माता, प्रकृति माता एवं गौ माता भी पूजनीय मानी गई हैं। यह हमारी संस्कृति की व्यापक मानवीय दृष्टि का परिचायक है। हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म Mother India में Nargis द्वारा निभाई गई मां की भूमिका भारतीय नारी के संघर्ष, त्याग और आत्मसम्मान का अमिट प्रतीक बन चुकी है। मां केवल बच्चों का पालन-पोषण ही नहीं करती, बल्कि उनके चरित्र निर्माण और भविष्य निर्माण की प्रथम शिक्षक भी होती है। विशेषकर किशोरावस्था एवं युवावस्था में माता-पिता, खासकर मां का यह महत्वपूर्ण दायित्व है कि वे अपने पुत्र-पुत्रियों को सही मार्गदर्शन दें, उनमें नैतिक मूल्यों का विकास करें तथा उन्हें अपराध, नशा, हिंसा और सामाजिक विकृतियों से दूर रहने की प्रेरणा दें। हर मां को अपने बच्चों की समस्याओं, मानसिक स्थिति, संगति और भविष्य के प्रति सजग रहना चाहिए तथा संवाद और संस्कार के माध्यम से उन्हें सकारात्मक दिशा प्रदान करनी चाहिए। परिवार में प्रेम, अनुशासन और संवाद का वातावरण ही बच्चों को भटकाव से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मां के प्रति सम्मान केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे व्यवहार, संस्कार और सामाजिक आचरण में भी परिलक्षित होना चाहिए। स्वयं की माता के साथ-साथ प्रत्येक महिला और प्रत्येक मां के सम्मान का भाव ही एक सभ्य एवं संवेदनशील समाज की पहचान है। मातृ देवो भव। प्रस्तोता: गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक, दिल्ली मोबाइल: 9910341785, 8178949704 Email: sampoornkranti2025@gmail.

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