*पिंडरा वाराणसी निवासी प्रताप सोनकर की सुपुत्री "श्रुति सोनकर" ने स्वर्ण पदक जीतकर खटीक समाज का नाम रोशन किया। 25 से 27 अप्रैल तक लखनऊ के बाबू के डी सिंह स्टेडियम में आयोजित प्रादेशिक कराटे प्रतियोगिता में भाग लेगी "श्रुति सोनकर"*

*कराटे : गौराकला में खेली गई जिलास्तरीय कराटे प्रतियोगिता में 400 खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम* *बालकों से ज्यादा बालिका कराटे में सर्वाधिक 45 खिलाड़ी* *जिला कराटे एसोसिएशन की ओर से जिलास्तरीय चैंपियनशिप 14 अप्रैल 2026 को गौराकला स्थित सेंट के सी स्कूल में खेली गई। इसमें जिले के 23 क्लबों और स्कूलों के 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसमें से 87 खिलाड़ियों का चयन प्रादेशिक कराटे प्रतियोगिता के लिए हुआ है। इसमें 45 बालिका 42 बालक काता और कुमिते की स्पर्धा में खेलेंगे। जिला कराटे संघ के सचिव दिलीप सैनी ने बताया कि यह प्रादेशिक कराटे प्रतियोगिता 25 से 27 अप्रैल तक लखनऊ के बाबू के डी सिंह स्टेडियम में खेली जाएगी।इस मौके पर गत वर्ष की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतनेवाले खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया गया। इसमें जूनियर वर्ग की खुशी यादव और सब जूनियर वर्ग की खुशी प्रजापति को साईकिल, अवंतिका सिंह को खेल किट दी गई। इसके अलावा अनंत गुप्ता, लक्ष्य भारद्वाज अलख यादव आदि को पुरस्कृत किया गया। मुख्य अतिथि समाजसेवी सौरभ पाठक ने खिलाड़ियों से परिचय लेकर खेल शुरु कराया। इस मौके पर डॉ प्रमोद यादव, आशुतोष सिन्हा, डॉ शम्स तबरेज शम्पू, रविनंदन तिवारी आदि मौजूद रहे। संचालन वाराणसी जिला कराटे एसोसिएशन के महासचिव दिलीप सैनी ने किया।* *इन्होंने जीता स्वर्ण पदक: बालिका वर्ग में ईशानवी सिंह, सुहानी यादव, ट्विंकल, शरण्या श्रीवास्तव, अद्विका पाण्डेय, निधि यादव, प्रियल मौर्य, काव्या पाठक,श्रीधा शुक्ला, वैनी, अंकिता मौर्य,, गृह राज सिंह, अवंतिका सिंह, आद्री सिंह, ब्राह्मी, नैंसी कुमारी,, लावण्या द्विवेदी, आध्या सिंह, आद्या त्रिपाठी, आराध्या ठाकुर, शिवांगी मिश्रा, प्रणवी श्रीवास्तव, "#श्रुति सोनकर", आराध्या त्रिपाठी, ख्याति गिरी,, श्रेया यादव, श्रेयशी सिंह, स्निग्धा सिंह, रति पटेल, आर्या मौर्य, आरोही उपाध्याय, दृष्टि चौबेपुर,, तमन्ना चौधरी, श्वेता विश्वकर्मा, अनुष्का कुमारी, खुशी यादव ने स्वर्ण पदक जीता है।* *तीन ने जीते पदक:* *गौराकला में आयोजित जिलास्तरीय कराटे प्रतियोगिता में सनबीम स्कूल भगवानपुर के कराटे खिलाड़ियों ने तीन पदक जीते हैं। स्कूल के खेल प्रभारी शशि प्रकाश सिंह ने बताया कि देव मद्धेशिया ने स्वर्ण, ओजस पांडेय ने रजत, और चिराग ने कांस्य पदक जीता है। प्रधानाचार्य मौसमी भट्टाचार्य ने बधाई दी है।* *अमर उजाला (वाराणसी संस्करण) में प्रकाशित यह समाचार—जिसमें कराटे प्रतियोगिता में 45 बालिका खिलाड़ियों की सर्वाधिक भागीदारी दर्ज की गई—सिर्फ एक सामान्य खेल खबर नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेतक है। इसका विस्तृत विश्लेषण कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाता है:* *1. लैंगिक समानता की दिशा में सकारात्मक संकेत इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि कराटे जैसे पारंपरिक रूप से “पुरुष-प्रधान” माने जाने वाले खेल में अब बालिकाएं संख्या और प्रदर्शन दोनों में आगे आ रही हैं। यह दर्शाता है कि समाज में लड़कियों के खेलों में भाग लेने को लेकर सोच बदल रही है। परिवारों द्वारा बेटियों को प्रोत्साहन बढ़ा है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसी नीतियों का परोक्ष प्रभाव भी दिखता है।* *2. आत्मरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता:* *कराटे सिर्फ एक खेल नहीं,बल्कि आत्मरक्षा का प्रभावी माध्यम है। बालिकाओं की अधिक भागीदारी यह संकेत देती है कि सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर जागरूकता बढ़ी है। विशेषकर शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अभिभावक अपनी बेटियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिलाने के प्रति अधिक सजग हुए हैं।* *3. वाराणसी जैसे शहर में सामाजिक परिवर्तन वाराणसी जैसे पारंपरिक और सांस्कृतिक शहर में इस प्रकार का ट्रेंड महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि छोटे और मध्यम शहरों में भी सामाजिक सोच तेजी से बदल रही है। खेलों में लैंगिक अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है।* *4. खेल संरचना और अवसरों का विस्तार इस बढ़ती भागीदारी के पीछे कुछ व्यावहारिक कारण भी हो सकते हैं:स्थानीय स्तर पर कराटे प्रशिक्षण केंद्रों की उपलब्धता,स्कूल/कॉलेजों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा, प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन। हालांकि, यह भी जरूरी है कि इन खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए उचित कोचिंग, संसाधन और प्लेटफॉर्म उपलब्ध हों। सिर्फ भागीदारी ही नहीं, बल्कि प्रतिभा विकास पर भी ध्यान दिया जाए।* *5. चुनौतियाँ जो अभी भी मौजूद हैं। हालांकि यह खबर सकारात्मक है, लेकिन कुछ सवाल भी उठाती है: क्या इन बालिकाओं को आगे राज्य/राष्ट्रीय स्तर तक जाने का अवसर मिलेगा? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही स्थिति है या यह सिर्फ शहरी सीमित उदाहरण है? क्या खेलों में लड़कियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा और सुविधाएं हैं?* *6. *नीति और प्रशासन के लिए संकेत* *यह आँकड़ा सरकार और खेल संस्थाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है: महिला खेलों में निवेश बढ़ाना चाहिए। स्कूल स्तर पर आत्मरक्षा प्रशिक्षण को अनिवार्य या प्रोत्साहित किया जा सकता है। स्थानीय प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने की योजनाएं बनाई जानी चाहिए।* *निष्कर्ष:* *यह समाचार केवल 45 बालिकाओं की भागीदारी का आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। यह नारी सशक्तिकरण, सुरक्षा जागरूकता और खेल संस्कृति—तीनों के संगम को दर्शाता है। यदि इस प्रवृत्ति को सही दिशा और संसाधन मिलते हैं, तो भविष्य में यह खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी उल्लेखनीय प्रदर्शन कर सकती हैं।* *पिंडरा वाराणसी निवासी प्रताप सोनकर (मोबाईल: 9651689699) की सुपुत्री "श्रुति सोनकर" ने स्वर्ण पदक जीतकर खटीक समाज का नाम रोशन किया। इस हेतु श्रुति सोनकर एवं उनके माता - पिता को भी हमारी अशेष शुभकामनाएं।* *प्रस्तोता: गोपाल प्रसाद खटीक (आरटीआई सेवक/स्वतंत्र पत्रकार, चिंतक, समालोचक) दिल्ली /वाराणसी मोबाईल: 09910341785, 08178949704, 7678261884 Email: sampoornkranti2025@gmail.com Blog: www.sampoorn-kranti.blogspit.com https://www.facebook.com/share/18NheSsJSD/

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