सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में आपत्ति एवं सुझाव
---------- Forwarded message ---------
From: Gopal Prasad
Date: Thu, Apr 2, 2026, 2:52 PM
Subject: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में आपत्ति एवं सुझाव
To: ,
सेवा में,
श्री अश्विनी वैष्णव जी
माननीय मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
माननीय मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
विषय: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में आपत्ति एवं सुझाव
महोदय,
सविनय निवेदन है कि केंद्र सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा जारी किया गया है, जिस पर 14 अप्रैल तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इस संदर्भ में निम्नलिखित तथ्यपरक विश्लेषण एवं सुझाव आपके समक्ष प्रस्तुत हैं:
1. सेफ हार्बर (Safe Harbour) प्रावधान पर प्रभाव
आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79 के अंतर्गत मध्यस्थ (Intermediaries) को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा प्रदान की गई है, जिससे वे यूजर-जनित कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराए जाते, बशर्ते वे निर्धारित नियमों का पालन करें।
प्रस्तावित संशोधन में इस सुरक्षा को सीमित करने से:
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अत्यधिक ओवर-कम्प्लायंस (Over-Compliance) का दबाव बढ़ेगा
कंपनियां विवादित या आलोचनात्मक कंटेंट को बिना पर्याप्त जांच हटाने लगेंगी। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अप्रत्यक्ष अंकुश (Chilling Effect) पड़ेगा।
2. सरकारी निर्देशों की बाध्यता
प्रस्ताव के अनुसार MeitY द्वारा जारी एडवाइजरी, SOP एवं दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य किया जा रहा है।
इससे संबंधित चिंताएं:
यह प्रावधान कार्यपालिका को अत्यधिक विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है
बिना न्यायिक समीक्षा के कंटेंट हटाने की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों के विपरीत हो सकती है
इससे शक्ति पृथक्करण (Separation of Powers) का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
3. सामान्य उपयोगकर्ताओं को दायरे में लाना
यदि आम नागरिकों को भी “डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड” के अंतर्गत लाया जाता है, तो:
आम नागरिकों में भय एवं आत्म-सेंसरशिप की स्थिति उत्पन्न होगी, जिससे लोकतंत्र में नागरिकों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति बाधित हो सकती है।
यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के मूलभाव के विपरीत प्रतीत होता है।
4. बिना शिकायत जांच की शक्ति
सरकार द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर किसी भी कंटेंट को जांच हेतु समिति के पास भेजने का प्रावधान:
मनमाने हस्तक्षेप (Arbitrary Intervention) की आशंका को जन्म देता है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता एवं जवाबदेही के मानकों पर प्रश्न खड़े कर सकती है।
5. डेटा संरक्षण से संबंधित प्रावधान
डेटा को अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखने और डिलीट न करने का प्रावधान:
एक ओर जहां यह जांच एजेंसियों के लिए उपयोगी हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर यह नागरिकों के गोपनीयता के अधिकार (Right to Privacy) (जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के Puttaswamy Judgment में स्थापित) से टकरा सकता है।
संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य
भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहां:
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला है
डिजिटल प्लेटफॉर्म आज आम नागरिक की आवाज का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं।
ऐसे में किसी भी नियमन का उद्देश्य संतुलन (Balance) होना चाहिए, न कि नियंत्रण (Control)
हमारे सुझाव:
प्रस्तावित संशोधनों को लागू करने से पूर्व विस्तृत सार्वजनिक विमर्श (Public Consultation) कराया जाए।
सेफ हार्बर प्रावधान को समाप्त करने के बजाय स्पष्ट एवं न्यायसंगत सीमाएं निर्धारित की जाएं।
कंटेंट हटाने/कार्रवाई हेतु न्यायिक या स्वतंत्र नियामक तंत्र सुनिश्चित किया जाए।
आम नागरिकों को एथिक्स कोड के दायरे में लाने के प्रावधान पर पुनर्विचार किया जाए।
डेटा संरक्षण के मामलों में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 के साथ सामंजस्य स्थापित किया जाए।
सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, अपील का अधिकार एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष:
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर निवेदन है कि प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार किया जाए तथा ऐसा संतुलित एवं न्यायसंगत ढांचा तैयार किया जाए जो:
नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही सुनिश्चित करे,
तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाए।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि जनभावनाओं एवं संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित संशोधनों को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए एवं इस पर पुनर्विचार किया जाए।
भवदीय,
गोपाल प्रसाद खटीक
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता
राष्ट्रीय सह संयोजक, भारत गठबंधन, दिल्ली
मकान नंबर-12, प्रथम तल, गली नंबर-5, चंदर विहार, निकट बालकनाथ मंदिर, आई. पी. एक्सटेंशन,
नई दिल्ली–110092
मोबाइल: 9910341785, 8178949704
ईमेल: sampoornkranti2025@gmail.com
स्थान: नई दिल्ली
दिनांक: 02.04.2026
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें