अतिशीघ्र होगा भ्रष्टाचार के विरुद्ध शंखनाद एवं जन अभियान का आगाज : गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक
अतिशीघ्र होगा भ्रष्टाचार के विरुद्ध शंखनाद एवं जन अभियान का आगाज : गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक
सुचिता, पारदर्शिता और जवाबदेही युक्त शासन प्रशासन....
वास्तविक लोकतंत्र हेतु आवश्यक सुधार एवं व्यवस्था परिवर्तन हेतु जन दबाव अभियान....
1. चुनाव सुधार
2. पुलिस सुधार
3. न्यायिक सुधार
4. प्रशासनिक सुधार
5. नीतिगत सुधार ....
विषयों पर पांच सत्रों में कार्यक्रम आयोजित होगा।
देश और जनता को गिरवी रखकर वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा देश को गुलाम बनाने पर बहस हो।
जजों की नियुक्ति, सभी न्यायालय में डबल शिफ्ट में सुनवाई,कॉलेजियम सिस्टम की अनिवार्यता, वकीलों एवं जजों के आय से अधिक संपत्ति तथा भ्रष्टाचार के मामले पर त्वरित कार्रवाई। बिलंब से मिला न्याय अन्याय के समान है।
जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग एवं विज्ञापन पर असीमित खर्च पर अविलंब रोक लगे।
गोदी मीडिया ने सरकार को किडनैप कर रखा है और सरकार से ब्लैकमेलिंग के आधार पर विज्ञापन के रूप मैं पैसा लूट रही है।
चुनावी घोषणा पत्र को कानूनी जामा पहनाया जाए।
राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी तय हो। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किए जाने पर पूरी कैबिनेट के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज दर्ज किए जाएं और ऐसे सभी नेताओं की चल अचल संपत्ति को जप्त करने का प्रावधान हो। वादे हैं, वादों का क्या और गृह मंत्री की भाषा में जुमलेबाजी अब नहीं चलेगी। नेताओं एवं अफसरों के आय से अधिक संपत्ति के मामले से संबंधित सभी जानकारी सार्वजनिक की जाए, सभी अघोषित संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित किया जाए।
सीमा से अधिक खर्च पर अंकुश लगे। सभी खर्च का प्रतिदिन का हिसाब जनता के समक्ष सार्वजनिक किया जाए। सभी सरकार बजट, खर्च, जिनको जिन जिन मद में भुगतान किए गए, अनुपयुक्त राशि, वापस की गई राशि, उपयोगिता प्रमाण पत्र, भ्रष्टाचार, वसूली, दण्ड, वर्तमान स्थिति तथा ऑडिट रिपोर्ट सहित संपूर्ण जानकारी के साथ श्वेत पत्र लाया जाए।
आरटीआई एक्ट की धारा 4 का चुनाव आयोग द्वारा पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित की जाए। चुनाव से संबंधित सभी सूचनाएं सार्वजनिक रूप से वेबसाईट पर अनिवार्य अपलोड की जाए।
वर्तमान केंद्र द्वारा दी गई और सीमित शक्ति जिसके कारण चुनाव आयोग के विरुद्ध कोई मुकदमा दर्ज नहीं होगा, जैसे प्रावधान को रद्द किया जाए।
राजनीतिक दलों को कॉरपोरेट फंडिंग, इलेक्शन बॉन्ड से अर्जित चल अचल संपत्ति की नियमित रूप से स्वतंत्र ऑडिट हो। "चंदा दो- धंधा लो" के फार्मूले पर बड़े बजट वाले समस्त टेंडरों की पुनर्समीक्षा हो। इससे संबंधित समस्त सूचनाएं सार्वजनिक की जाए।
पूरे देश में वोट चोरी, वोट डिलीट में संलग्न सभी दोषियों के भ्रष्टाचार के विरुद्ध अविलंब आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और उसकी स्वतंत्र एजेंसी से त्वरित जांच एवं ऑडिट हो। चुनावी तंत्र की पूरी पारदर्शिता की गारंटी सुनिश्चित हो। चुनाव आयोग सार्वजनिक करे कि उसकी क्या क्या जिम्मेदारी है? चुनाव आयोग के अधिकार और कर्तव्य के प्रावधान की जानकारी आम जनता को सरल और सुलभ तरीके से उपलब्ध कराया जाए।
विभिन्न चुनावों में खड़े सभी उम्मीदवारों के चुनावी एफिडेविट में दी गई जानकारी की जांच करने का अधिकार और शिकायत सही पाए जाने पर समय सीमा में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था हो।
राजनीति के अपराधीकरण के विरूद्ध ADR संस्था के सुझावों पर अमल हो। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा की गई घोषणा जिसमें उन्होंने कहा था कि दागी सांसदों, विधायकों के सभी मुकदमों का स्पीडी ट्रायल होगा, का अविलंब क्रियान्वयन हो।
RSS एवं अन्य ऐसे सभी संगठन जो गैर पंजीकृत होने के बाबजूद जनता एवं कंपनियों से धन संग्रह कर रहे हैं, के द्वारा अर्जित अकूत चल अचल संपत्ति पर ED, CBI, Income Tax की छापेमारी क्यों नहीं?
राजनीतिक दलों एवं बीसीसीआई को आयकर छूट के प्रावधान को खत्म किया जाए।
राजनीतिक दलों, ROC में पंजीकृत कंपनियों, बिजली कंपनियों, पीएम केयर फंड,बीसीसीआई को RTI एक्ट के दायरे में लाया जाए।
आरटीआई में प्रथम अपील, द्वितीय अपील, तृतीय अपील की समय सीमा तय हो।
केंद्रीय सूचना आयोग एवं राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की त्वरित नियुक्ति हो ताकि बढ़ते अपीलों की संख्या कम हो और आरटीआई आवेदकों को सूचना समय सीमा में मिल सके।
केंद्र सरकार एवं सभी राज्य सरकारों एवं स्थानीय निकायों को आरटीआई एक्ट की धारा 4 का पूर्ण क्रियान्वयन करने की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए।
जिसके तहत विभाग से संबंधित समस्त सूचनाओं को विभागीय वेबसाइट पर डाले जाने का अनिवार्य प्रावधान है। इस नियम की अवहेलना करने वाले पर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने का प्रावधान हो।
अडानी- अंबानी समूह की कंपनियों को विभिन्न बैंकों से किन शर्तों और किसकी गारंटी पर भारी भरकम कर्ज दिया गया?
अडानी समूह की कंपनियों में LIC से भारी दबाव देकर जनता की गाढ़ी कमाई की भारी भरकम रकम का निवेश किस आधार पर किसके आदेश पर कराया गया?
अडानी समूह की कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, वन अधिनियम एवं रक्षा भूमि अधिनियम में संशोधन क्यों किया गया?
सरकार की मीडिया नीति, अधिकतम मीडिया बजट, विज्ञापन की उपयोगिता, नई तकनीक का उपयोग करने के बजाय पब्लिक मनी का गैर जरूरी बेतहाशा खर्च का जिम्मेदार कौन है?
गोदी मीडिया ने सरकार को किडनैप कर रखा है और सरकार से ब्लैकमेलिंग के आधार पर विज्ञापन वसूलने की होड़ लगी है। कई मीडिया घरानों को अनेक प्रकार से लाभान्वित किया जा रहा है और जनता बेबस है। सरकार के गलत नीतियों पर भी गैर प्रामाणिक तथ्यों और फेक न्यूज के आधार पर कसीदे गढ़े जा रहे हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की क्या कोई जिम्मेदारी नहीं है?
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया आज कॉर्पोरेट घराने और सरकार की गुलाम बन चुकी है। मिशन पत्रकारिता का स्थान प्रोफेशनल पत्रकारिता ने ले लिया है। एकाध को छोड़कर ज्यादातर मीडिया समूहों के अधिकतम शेयर अडानी और अंबानी के पास आ चुके हैं, ऐसे में जन सरोकार के खबरों की घोर उपेक्षा और असली वास्तविक खबरों को छुपाने का दुस्साहस किया जा रहा है। कई मीडिया घरानों ने अपने प्रकाशन के नाम पर जो सरकारी जमीन लिया था, उस स्थान को किराए पर देकर करोड़ों अर्जित कर रहे हैं और सरकारी गुलाम तंत्र मौन है।
भारत के 150 करोड़ लोगों के हक और हुकूक की हत्या के लिए दो लोग सुपारी दे रहे हैं और तीन सुपारी ले रहे हैं।
जनता को कर से राहत के बजाय कर के मकड़जाल में लपेटा जा रहा है। नाजायज तरीके से GST बढ़ाने के बाद आंशिक छूट देकर जीत का जश्न मनाया जा रहा है। GST की पूरी नीति की पुनर्समीक्षा हो तथा जनता की मूलभूत सुविधाओं से संबंधित उत्पाद और सेवाओं पर GST खत्म हो। GST से प्राप्त आय और व्यय का प्रतिदिन का संपूर्ण ब्यौरा संबंधित वेबसाईट पर सार्वजनिक की जानी चाहिए।
केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी और कालाधन वापस लाने के फैसले के परिणाम, उपलब्धियों का संपूर्ण ब्यौरा सार्वजनिक अब तक क्यों नहीं किया गया?
जिन जिन कॉर्पोरेट घरानों के द्वारा लिए गए कर्ज को जिस आधार पर राईट ऑफ करके जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई को लूट की छूट जिनके आदेश पर जिस नियमों के आधार पर दी गई, उस प्रावधान को तुरंत रद्द किया जाए। आप जनता को कर्ज देने का अलग प्रावधान और कॉर्पोरेट घरानों को कर्ज देने का अलग प्रावधान अब नहीं चलेगा। वास्तव में यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
सरकार द्वारा बेतहाशा कर्ज लेने एवं गैर जरूरी मद वाले समस्त खर्चों पर अंकुश लगे। केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा कर्ज लेने की अधिकतम सीमा तय हो। विज्ञापन मद में बेतहाशा खर्च पर अविलंब अंकुश लगे। कर्ज के पैसे का दुरुपयोग रोकने एवं पारदर्शिता व जिम्मेवारी युक्त प्रभावी नीति का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
लोकपाल और लोकायुक्त अपने उद्देश्यों में पूर्णरूपेण विफल हो चुका है और सफेद हाथी बन चुका है। इनकी उपयोगिता, उपलब्धियों की व्यापक समीक्षा की जाए। शायद अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। लोकपाल और लोकायुक्त कार्यालय संचालन मद की संपूर्ण राशि न्यायिक सुधार खर्च मद में आवंटित किया जाए।
ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, चुनाव आयोग भी न्यायिक दायरे में लाए जाएं।
केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के सभी विभागों में नियुक्ति प्रक्रिया अविलंब शुरू कर बहाली की जाए।
आरक्षित पदों को नियमानुकूल अतिशीघ्र भरा जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रतिवर्ष दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने की घोषणा का अविलंब क्रियान्वयन हो।
दलितों के लिए स्पेशल कंपोनेंट प्लान की राशि का नियमानुकूल मद में ही खर्च किए जाएं। बजट की राशि का दुरुपयोग करनेवाले के विरूद्ध अतिशीघ्र वैधानिक कार्रवाई की जाए।
केंद्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्न जांच एजेंसियों सीबीआई, ED, DRI, नारकोटिक्स, इनकम टैक्स, एक्साईज, कस्टम आदि में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने का प्रावधान हो। उनके द्वारा दर्ज मामले, बरामदगी, रिकवरी की गई राशि किस खाते में जमा है तथा लगाए गए जुर्माने, दोषी कंपनियों एवं संबंधित व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक की जाए। इन एजेंसियों का दुरुपयोग करने, सत्ताधारी दलों के नेताओं, अफसरों एवं उपकृत करनेवाले कंपनियों को बचाने की मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो। सरकार बताए कि इनका कन्विकसन रेट न्यूनतम क्यों है? सरकार को सार्वजनिक रूप से यह बयान देना होगा कि ऐसे आरोपी नेता जिनके विरुद्ध जांच चल रही थी, भाजपा ज्वाइन करते ही उनके विरुद्ध मामले बंद क्यों हो गए?
केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में CAG द्वारा किए गए खुलासे के बाद जिम्मेदार दोषी अधिकारियों एवं फर्मों के विरुद्ध दर्ज किए गए मामले, रिकवरी, अनियमितता एवं भ्रष्टाचार में संलग्न समस्त अधिकारियों एवं कंपनियों, व्यक्तियों के विरुद्ध की गई समस्त कार्रवाई और अद्यतन स्थिति तथ्यपरक विश्लेषण सहित जानकारी RTI Act की धारा 4 के तहत विभागीय वेबसाईट पर सार्वजनिक की जाए। आखिर जनता को यह सब जानने का अधिकार क्यों नहीं है?
विकास की परिभाषा पुनः परिभाषित किया जाना चाहिए। विकास की वर्तमान परिभाषा के बजाय प्रकृति केंद्रित विकास की अवधारणा पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
गरीबी रेखा की परिभाषा पुनः परिभाषित किया जाना चाहिए। सरकार वेतन आयोग के परामर्श पर सरकारी कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता और वेतन बढ़ा देती है। डीजल, पेट्रोल और कुकिंग गैस की मूल्य बढ़ोतरी, सांसदों, विधायकों के वेतन एवं सुविधाओं में बेतहाशा वृद्धि करती है परंतु घोर आश्चर्य की बात है कि गरीबी रेखा (32 रुपए प्रतिदिन में निर्वहन करनेवाले को ही सरकार गरीब मानती है) के नियमों में निर्धारण का आधार अभी तक क्यों नहीं बदला गया?
सरकार अब "अमीरी रेखा" तय करे। "सुपर रिच कैटिगरी" का निर्धारण करके ऐसे लोगों से ज्यादा टैक्स लिए जाने का प्रावधान लागू किया जाए। वास्तव में सरकार की गलत एवं निरंकुश नीतियों के कारण समाज में वर्गभेद और असमानता की खाई बढ़ गई है। वर्तमान समय में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं तथा गरीब और अधिक गरीब होते जा रहे हैं। जिसके कारण अमीर और गरीब के बीच असमानता की बड़ी खाई बनती जा रही है।
उपरोक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार अतिशीघ्र जिम्मेवारी का अधिकार
(Right to Responsibility Act) कानून पारित करना चाहिए।
प्रस्तोता/कार्यक्रम संयोजक :
गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक, दिल्ली
व्हाट्सएप: 08178949704
मोबाईल: 09910341785,07678261884
ईमेल: sampoornkranti2025@gmail.com
Twitter(X): @varanasilok2024
Blog: www.sampoorn-kranti.blogspot.com
आमंत्रित अतिथिगण :
1. डॉ. कमल टावरी, ग्रेटर नोएडा (IAS Retd.)
2.डॉ अरुणा राय (IAS Retd.)
3. अमिताभ दास, दरभंगा (IPS Retd.)
4. डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी, दिल्ली (भाजपा सांसद)
5. मार्कण्डेय काटजू (सेवानिवृत न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट)
6. कपिल सिब्बल, दिल्ली (वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट)
7. एडवोकेट सतीश उपाध्याय, (सुप्रीम कोर्ट)
8. प्रशांत भूषण (वरिष्ठ अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट)
9. डॉ. नीरज कुमार, लखनऊ (RTI Book's Writer)
10. अंजलि भारद्वाज (RTI Activist)
11. निखिल डे (RTI Activist)
12 डॉ. सलीम बेग (RTI Activist)
13. एडवोकेट तनवीर अहमद सिद्दीकी, लखनऊ (RTI Activist)
14. रजी हसन, मुजफ्फरपुर (RTI Activist)
15. अनिल अग्रवाल, छत्तीसगढ़ (RTI Activist)
16. योगेंद्र यादव, दिल्ली (राजनीतिक विश्लेषक)
17. अशोक वानखेड़े, दिल्ली (राजनीतिक विश्लेषक)
18. उर्वशी शर्मा, लखनऊ (RTI Activist)
19. मुन्नालाल शुक्ला, लखनऊ (RTI Activist)
20. डॉ सूर्यप्रकाश कपूर, दिल्ली (वैज्ञानिक)
21. देवेंद्र बल्हारा,चंडीगढ़ (सामाजिक कार्यकर्ता)
22. सत्यप्रकाश भारत, दिल्ली (सामाजिक कार्यकर्ता)
23. बलदेव राज सूद, हिमाचल प्रदेश (राष्ट्रीय अध्यक्ष, स्वाभिमान पार्टी एवं राष्ट्रीय संयोजक भारत गठबंधन)
24. पवन खेड़ा (राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस पार्टी)
25. सुप्रिया श्रीनेत (राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस पार्टी)
26. संजय सिंह, दिल्ली (सांसद आम आदमी पार्टी)
27. अशोक लवासा (पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त)
28. कमलेश त्रिपाठी, सतना (न्यायिक सुधार हेतु सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता)
29. अशोक पाण्डेय, दिल्ली (यूट्यूब चैनल)
30. संजय शर्मा, दिल्ली (संपादक यूट्यूब चैनल)
31. दीपक शर्मा, दिल्ली (संपादक, यूट्यूब चैनल)
32. नवीन कुमार, दिल्ली (संपादक, यूट्यूब चैनल)
33. हरेंद्र प्रताप,भागलपुर (वरिष्ठ पत्रकार)
34. नेहा सिंह राठौड़, लखनऊ (भोजपुरी लोक गायिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता)
35. ध्रुव राठी (सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर)
36. रवीश कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)
37. प्रज्ञा मिश्रा (संपादक,उल्टा चश्मा यूट्यूब चैनल)
38. अभिसार शर्मा, दिल्ली (यूट्यूब चैनल संपादक)
39. साक्षी जोशी, दिल्ली (यूट्यूब चैनल संपादक)
40. अरफा खानम शेरवानी(यूट्यूब चैनल संपादक)
41. सौरभ शुक्ला, दिल्ली (Ex एनडीटीवी पत्रकार)
42. जाकिर अली त्यागी, दिल्ली (यूट्यूब चैनल संपादक)
43. रमा पाण्डेय, दिल्ली (वरिष्ठ रंगकर्मी)
44. के.पी.मलिक, दिल्ली (राजनीतिक संपादक, दैनिक भास्कर)
45. चेयरमैन PTI, दिल्ली
46. चेयरमैन INS, दिल्ली
47. चेयरमैन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली
48. चेयरमैन एडिटर्स गिल्ड, दिल्ली
49. अभिषेक शुक्ला, कानपुर (IAPC)
50. जे. सी. उप्रेती, लखनऊ (पूर्व अपर सचिव लोकायुक्त उत्तराखंड)
51. सुल्तान सिंह, फर्रुखाबाद (राष्ट्रीय शराबबंदी संयुक्त मोर्चा)
52. सरदार चरणजीत सिंह पत्रकार
53. अनूप श्रमिक (सामाजिक कार्यकर्ता, वाराणसी)
54. रामधीरज, वाराणसी (सर्व सेवा संघ उप्र प्रभारी)
55. चंदन पाल (सर्व सेवा संघ राष्ट्रीय अध्यक्ष)
56. नंदलाल (शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता वाराणसी)
57. प्रो. आनंद कुमार (अध्यक्ष, सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी)
58. अभय सिन्हा (चेयरमैन,जयप्रकाश नारायण अध्ययन एवं शोध संस्थान)
59. गोपीदत्त आकाश, दिल्ली (पर्यावरण कार्यकर्ता)
60. डॉ. ओंकार मित्तल, दिल्ली (सामाजिक चिंतक)
61. एडवोकेट अमित त्रिपाठी, वाराणसी
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