केंद्रीय एवं राज्य सरकारों की जांच एजेंसियों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में सार्वजनिक पत्र
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From: Gopal Prasad
Date: Mon, Dec 8, 2025, 8:45 AM
Subject: केंद्रीय एवं राज्य सरकारों की जांच एजेंसियों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में सार्वजनिक पत्र
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दिनांक : 08.12.2025
सेवा में,
माननीय मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय
माननीय राष्ट्रपति महोदय, भारत गणराज्य
माननीय उप राष्ट्रपति एवं राज्यसभा अध्यक्ष
माननीय प्रधानमंत्री
माननीय गृह मंत्री
माननीय वित्त मंत्री
माननीय विधि एवं न्याय मंत्री
माननीय लोकसभा अध्यक्ष
जेनरल सेक्रेटरी, लोकसभा
जेनरल सेक्रेटरी, राज्यसभा
योजना मंत्री
वाइस चेयरमैन नीति आयोग
सीईओ नीति आयोग
सचिव वित्त मंत्रालय
विषय: केंद्रीय एवं राज्य सरकारों की जांच एजेंसियों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में सार्वजनिक पत्र
महोदय,
सादर निवेदन है कि आज के लोकतांत्रिक युग में केंद्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्न जांच एजेंसियां जैसे कि सीबीआई, ईडी, डीआरआई, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, इनकम टैक्स विभाग, एक्साइज, कस्टम आदि राष्ट्रहित की सुरक्षा एवं भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र के रूप में कार्यरत हैं। तथापि, इन एजेंसियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने के उचित कड़े प्रावधान न होना गंभीर चिंता का विषय है।
इन एजेंसियों द्वारा दर्ज किए गए मुकदमों, बरामद की गई वस्तुओं एवं निकाली गई राशि का विवरण किस खाते में जमा है, लगाए गए जुर्मानों की राशि, दोषी कंपनियों एवं व्यक्तियों के नाम समेत समस्त जानकारी सार्वजनिक किया जाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही ऐसी मॉनिटरिंग व्यवस्था स्थापित की जाए, जिससे सत्ताधारी दल के नेताओं, अधिकारियों एवं उपकृत कंपनियों की संरक्षण में किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके।
समाज में यह प्रश्न उठता है कि इन एजेंसियों का कन्विक्शन रेट न्यूनतम क्यों है? इसके अतिरिक्त, ऐसे आरोपी नेता जिनके विरुद्ध जांच चल रही थी, भाजपा पार्टी में शामिल होते ही उनके विरुद्ध मामलों को बंद क्यों किया जाता है, इस पर सरकार को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना होगा।
वहीं, CAG (सेंट्रल ऑडिट ऑफ इंडिया) द्वारा किए गए खुलासों के संदर्भ में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं में संलिप्त दोषी अधिकारियों, फर्मों के विरुद्ध दर्ज की गई कार्रवाइयों, रिकवरी, केसों की स्थिति सहित पूर्ण तथ्यात्मक जानकारी RTI अधिनियम 2005 की धारा 4 के तहत विभागीय वेबसाइटों पर नियमित रूप से अपलोड कर जनता को सूचित किया जाना चाहिए। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके करों से अर्जित धन का उपयोग किस प्रकार से हो रहा है।
इसके अतिरिक्त, विकास की वर्तमान परिभाषा पर पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। केवल आर्थिक विकास को केंद्रित रखकर समग्र और प्रकृति-संवेदनशील विकास की संकल्पना को भी समान रूप से लागू किया जाना चाहिए जिससे सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
गरीबी रेखा की मौजूदा परिभाषा में तत्काल सुधार किया जाना आवश्यक है। जबकि वेतन आयोग सरकार को कर्मचारियों के वेतन एवं महंगाई भत्ते को बढ़ाने की सलाह देता है, डीजल, पेट्रोल, गैस जैसी अत्यावश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है, और सांसदों-प्रदेश विधायकों के वेतन सुविधा में वृद्धि होती है, तब भी गरीबी रेखा में सुधार क्यों नहीं होता जो 32 रुपए प्रतिदिन से ही निर्धारित है? सरकार को "अमीरी रेखा" निर्धारित करते हुए "सुपर रिच" श्रेणी का निर्धारण कर उन व्यक्तियों से आयकर वसूली बढ़ाने का प्रावधान शीघ्र लागू करना चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों में अमीर वर्ग और गरीब वर्ग के बीच खाई बढ़ती जा रही है, जिससे समाज में असमानता एवं वर्ग संघर्ष तीव्र होते जा रहे हैं।
अतः उपरोक्त गौरवपूर्ण विषयों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा उत्तरदायित्व के अधिकारों की स्पष्ट परिभाषा देते हुए "Right to Responsibility Act" का निर्माण एवं शीघ्र पारित करना अनिवार्य हो गया है, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही, न्यायिक सुदृढ़ता एवं सामाजिक समरसता सुनिश्चित हो सके।
निश्चित रूप से केंद्र में आसीन मोदी सरकार को उपरोक्त विषयों पर जनता के समक्ष श्वेत पत्र सार्वजानिक करना चाहिए ताकि इस लोकतंत्र पर जनता का भरोसा कायम रह सके।
आपकी कृपा से इस विषय पर आवश्यक कारगर कदम उठाने एवं शीघ्र पत्रोत्तर की आशा के साथ,
भवदीय,
गोपाल प्रसाद खटीक (आरटीआई सेवक)
राष्ट्रीय सह संयोजक, भारत गठबंधन
निर्दलीय प्रत्याशी, अमेठी लोकसभा क्षेत्र 2019
निवास: मकान नंबर-12, गली नंबर-5, चंदर विहार निकट बालकनाथ मंदिर, आई पी एक्सटेंशन,
नई दिल्ली–110092
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स्थान : नई दिल्ली
दिनांक : 08.12.2025
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