इस देश की जनता की क़िस्मत में वोट देना और भगदड़ में मर जाना ही लिखा है क्या?: गोपाल प्रसाद

महाकुंभ मेले की महाभगदड़ से देश उबर भी नहीं पाया था कि कल रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मच गई और तमाम लोग कुचल कर मर गए. बात-बात पर हिंदू ख़तरे में हैं का राग अलापने वाले भाजपा नेता कहाँ ग़ायब हैं? कल रेलवे स्टेशन की भगदड़ में मरे लोग हिंदू थे या नहीं? इन मौतों की ज़िम्मेदारी कोई क्यों नहीं लेता? अश्विनी वैष्णव का काम फ़र्ज़ी रील्स बनाना ही रह गया है क्या? अरे नहीं सम्भाल पा रहे हैं तो इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे रहे हैं? रेलवे पर एहसान कर दीजिए सर…अब रेलवे का पिंड छोड़ दीजिए. इस देश की जनता की क़िस्मत में वोट देना और भगदड़ में मर जाना ही लिखा है क्या? रोज़ सुबह उठते ही कहीं भगदड़ में मौतों की ख़बर मिलती है तो कभी बेड़ियों से बंधे हिंदुस्तानियों की तस्वीरें दिखती हैं…कभी आदिवासियों के अपमानों की दास्तान सुनाई पड़ती है तो कभी बेरहमी से क़त्ल हुई बेटी की लाश दिखाई पड़ती है…बाक़ी मणिपुर की तो बात करना ही बेकार है… पूरे देश में जंगलराज चल रहा है और मोदीजी अमेरिका से कबाड़ जेट ख़रीदने में लगे हैं ताकि डोनाल्ड ट्रम्प उनके बैठने के लिए कुर्सी खींच दें और उन्हें कुछ अच्छी तस्वीरें मिल जायें. इस देश का दुर्भाग्य है कि देश के नेता देश की जनता को कीड़े-मकौड़ों की तरह मरते देखकर भी अपनी मस्ती में चूर हैं…और तमाशा दिखाने वालों की तरह भीड़ इकट्ठा करते जा रहे हैं. ये देश भगवान भरोसे चल रहा है. गोपाल प्रसाद खटीक आरटीआई सेवक प्रत्याशी दिल्ली जनता पार्टी पटपड़गंज विधानसभा

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