वर्ष 2014 के बाद प्रशासनिक निर्णयों, फाइल-नोटिंग्स और संभावित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग दिल्ली स्थित आरटीआई सेवक एवं भारत गठबंधन के सह संयोजक गोपाल प्रसाद ने अपने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि "देश में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों, CAG ऑडिट टिप्पणियों, न्यायालयीन अवलोकनों और RTI के माध्यम से समय-समय पर यह तथ्य सामने आए हैं कि कई नीतिगत निर्णयों, वित्तीय स्वीकृतियों और प्रशासनिक आदेशों में प्रक्रियागत कमियाँ और नियमों से विचलन दर्ज किए गए।" प्रशासनिक व्यवस्था में यह स्थापित तथ्य है कि प्रत्येक सरकारी निर्णय फाइल-नोटिंग, अनुमोदन और रिकॉर्ड-संरक्षण के माध्यम से लिया जाता है। इन्हीं रिकॉर्ड्स के आधार पर बाद में ऑडिट, न्यायिक समीक्षा और संसदीय निगरानी संभव होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन रिकॉर्ड्स को समय पर सार्वजनिक जांच के दायरे में नहीं लाया गया, तो सत्ता परिवर्तन की स्थिति में बड़े-बड़े प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में गंभीर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। गोपाल प्रसाद ने यह मांग किया है ...
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