हिंद क्रांति यात्रा* - *न्यायिक व्यवस्था में बदलाव के लिए*

*हिंद क्रांति यात्रा* - *न्यायिक व्यवस्था में बदलाव के लिए* *माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका फाइल करने के पूर्व न्याय व्यवस्था में सुधार चाहने वालों के सुझाव, सहयोग एवं आलोचना आमंत्रित।* *संविधान के अनुच्छेद 50, 141, 144,145 एवं अन्य अनुच्छेद* *अब नहीं सहेंगे सर्वोच्च न्यायालय का अपमान* *हजारों साल की तपस्या के बाद हजारों योनियों में भटकने के बाद मनुष्य मृत्यु लोक में जन्म लेता है। वह मृत्यु लोक में सुख शांति एवं ईच्छा लेकर जीवन जीता है और मनुष्य के जन्म एवं मरण की समय सीमा है पर न्यायालय में विवादों के निराकरण की कोई समय सीमा नहीं है। मनुष्य रिले रेस की तरह अपने वंशजों को आगे बढ़ाता है। कोई भी राष्ट्र दो तरह के लोगों से बनता है। एक अपनी सुविधा, सुरक्षा एवं आवश्यकता के लिए पे करता है (धन खर्च करता है)। दूसरा जो अपने जीवन यापन के लिए अपने श्रम का पारिश्रमिक प्राप्त करता है। अंग्रेजों द्वारा बनाई गई पूरी व्यवस्था बिना जवाबदेही के चलाई जाती थी , जो आज भी चल रही है।* *निर्णय के बजाय न्याय के सिद्धांत पर न्यायालयों के संचालन के लिए सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका अंग्रेजों की बनाई गई पूरी न्याय व्यवस्था जूनियर ने अपील कोर्ट फीस एवं बिना जवाबदेही के आज तक संचालित है। भारत के माननीय न्यायाधीशों की नियुक्ति के पूर्व दिलाए जाने वाली शपथ*-- *मैं...........जो भारत के उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति या न्यायाधीश नियुक्त हुआ हूं, ईश्वर की शपथ लेता हूं, सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा। मैं भारत की प्रभुता, अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा तथा मैं सम्यक प्रकार से श्रद्धापूर्वक तथा अपनी पूरी योग्यता, ज्ञान और विवेक से अपने पद के कर्तव्यों का भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना पालन करूंगा तथा मैं संविधान और विधियों की मर्यादा बनाए रखूंगा।* *(क) विधि की अज्ञानता क्षम्य नहीं।* *(ख) क्या न्यायाधीश अधिवक्ता तथा जांच एजेंसियों को मुक्त रखा गया है। न्याय की कभी अपील नहीं होती। जिसकी अपील हो वह अन्याय है। अन्याय करनेवाला न्यायाधीश या न्यायमूर्ति कैसे?* *जनहित याचिका दायर करनेवाले पक्षकार - कमलेश त्रिपाठी,*"राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय हिन्द क्रांति पार्टी एवं अन्य* *बनाम* *1.केंद्र सरकार एवं सभी राज्य सरकारें।* *2. भारत का सर्वोच्च न्यायालय एवं सभी राज्यों के उच्च न्यायालय।* *3. भारत की सभी जाँच एजेंसियाँ, केंद्र सरकार एवं सभी राज्य सरकारें।* *4.बार काउंसिल ऑफ इंडिया एवं सभी राज्यों के राज्य अधिवक्ता संघ।* *5. एवं अन्य* *(A) विवादों के निराकरण में लगनेवाले समय को एक वर्ष करने के लिए न्याय व्यवस्था में लगे सभी व्यक्तियों जैसे अधिवक्ता, न्यायाधीश, जांच एजेंसियों को पर्याप्त साधन, सुविधा एवं सुरक्षा उपलब्ध कराकर उनके पदीय दायित्वों की जवाबदेही एवं दंड तय कराना एवं कानून की किताबों से अपील शब्द हटाकर शिकायत शब्द जुड़वाना।* *(B) केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा राष्ट्रीय एवं राज्य नीति तय कराना।* *(C) भारतीय सर्वोच्च न्यायालय एवं सभी राज्यों के उच्च न्यायालय एवं देश के सभी न्यायालय में विवादों के निराकरण के संबंध में प्रक्रिया बनवाना एवं कार्यपालिका के न्यायिक अधिकार समाप्त कराना, अपराधी को ही न्यायाधीश बनाना गलत है।* *(D) न्यायालयों के आदेश एवं डिक्रियों को लेकर अपमानित होकर घूम रहे लोग न्याय व्यवस्था के कमजोर होने के कारण देश में अराजकता आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार बढ़ाने का एक कारण यह भी है।* *(E) देश में 1870 से चल रहा न्याय का व्यापार समाप्त करने का प्रयास।* *लक्ष्य -1947 से के पहले लक्ष्य था अंग्रेजों वापस जाओ, 1947 के बाद गुलाम बनानेवाली व्यवस्था एवं विवादों के निराकरण को लंबा खींचने वाली अंग्रेजों की बनाई न्यायिक व्यवस्था को समाप्त कर भारत को सशक्त शक्तिशाली संपन्न राष्ट्र बनानेवाली व्यवस्था का निर्माण।* *अनुमानित लागत 20000 करोड़* *देश की अदालतों में लंबित 5 करोड़ से अधिक मुकदमे, जिसमें 60 करोड़ से अधिक लोग न्यायिक अराजकता के शिकार हैं, पहले 6 माह में एक करोड़ मुकदमों को कम करना एवं अगले साल में 80% मुकदमों को कम करने का प्रयास करना।* *पैसा कहां से आएगा:- केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के सहयोग से एवं न्यायिक व्यवस्था में सुधार चाहने वालों के सहयोग से।* *पैसा कहां खर्च होगा:- न्याय व्यवस्था में लगे लोगों को साधन, सुविधा, सुरक्षा उपलब्ध कराने एवं अन्य कार्यों में।* ___________________________________ *कमलेश त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय हिंद क्रांति पार्टी, मोबाइल नंबर : 9425173019* *संपर्क सूत्र : अखिल भारतीय हिंद क्रांति पार्टी* *Email: hindkrantiparty@ gmail.com* *www.hindkrantiparty.com (Under Process)*

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