ग्राम सभा: कितना सफल, कितना असफल?: गोपाल प्रसाद

📑 ग्राम सभा: कितना सफल, कितना असफल? 1. संवैधानिक आधार 73वें संविधान संशोधन (1992) में अनुच्छेद 243 के तहत ग्राम सभा को ग्राम स्वराज और जन सहभागिता की नींव माना गया। ग्राम सभा का कार्य: योजनाओं की स्वीकृति, सामाजिक अंकेक्षण, संसाधनों का प्रबंधन, जनहित निर्णय। --- 2. सफलता के पहलू ✅ लोकतांत्रिक भागीदारी – ग्रामीण नागरिकों को सीधे निर्णय प्रक्रिया में जोड़ना। ✅ सामाजिक अंकेक्षण – मनरेगा, पंचायत योजनाओं आदि की निगरानी का मंच। ✅ स्थानीय समस्या समाधान – पीने का पानी, सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य जैसी स्थानीय आवश्यकताओं पर ग्राम सभा निर्णय ले सकती है। ✅ सशक्त उदाहरण – केरल में “पीपुल्स प्लान” के जरिए ग्राम सभा की सक्रियता। महाराष्ट्र के हिवरे बाजार या रालेगांव सिद्धि जैसे गांवों ने सामूहिक निर्णय से आदर्श उदाहरण रखे --- 3. असफलता के पहलू ❌ कम उपस्थिति – अधिकांश ग्राम सभाओं में 15–20% से अधिक लोग शामिल नहीं होते। ❌ औपचारिकता मात्र – कागज़ी खानापूर्ति, वास्तविक चर्चा और बहस का अभाव। ❌ राजनीतिक हस्तक्षेप – प्रधान, सरपंच या स्थानीय दबंग वर्ग का नियंत्रण। ❌ महिला एवं कमजोर वर्ग की भागीदारी की कमी – आरक्षण के बावजूद कई जगह प्रभावशाली वर्ग निर्णय थोपते हैं। ❌ सूचना का अभाव – योजनाओं और अधिकारों की जानकारी ग्रामीणों तक समय से नहीं पहुँचती। ❌ जवाबदेही कमजोर – ग्राम सभा के निर्णयों को अक्सर प्रशासन या विभागीय अधिकारियों द्वारा नजरअंदाज किया जाता है। --- 4. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव सफल ग्राम सभाओं ने ग्रामीणों में सामूहिकता, पारदर्शिता और विकास की भावना पैदा की। कमजोर ग्राम सभाओं ने भ्रष्टाचार, योजनाओं की विफलता और संसाधनों के असमान वितरण को बढ़ावा दिया। --- 5. कारण ग्राम सभा को संवैधानिक दर्जा मिला है पर कानूनी दायित्व सीमित हैं। प्रशासनिक अमला ग्राम सभा को औपचारिक समझता है। ग्रामीण समाज में जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी। --- 6. आगे की राह (सिफारिशें) 🔹 डिजिटलीकरण – ग्राम सभा कार्यवाही को ऑनलाइन पोर्टल/मोबाइल ऐप से जोड़ना। 🔹 अनिवार्य उपस्थिति – ग्राम सभा की तिथि को “स्थानीय अवकाश” घोषित करना। 🔹 सामाजिक अंकेक्षण को बाध्यकारी बनाना – योजनाओं का पैसा ग्राम सभा की अनुमति से ही खर्च हो। 🔹 जागरूकता अभियान – विद्यालय, स्वयं सहायता समूह, एनजीओ के सहयोग से ग्राम सभा की उपयोगिता समझाना। 🔹 महिला एवं दलित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण व स्वतंत्र मंच। --- 7. निष्कर्ष 👉 ग्राम सभा की सफलता और असफलता दोनों उसके संचालन, जागरूकता और राजनीतिक हस्तक्षेप पर निर्भर हैं। 👉 जहां लोग जागरूक और संगठित हैं (जैसे केरल, महाराष्ट्र के कुछ गांव), वहां ग्राम सभा लोकतंत्र की असली प्रयोगशाला साबित हुई है। 👉 लेकिन अधिकांश राज्यों में यह औपचारिकता बनकर रह गई है। इसलिए, ग्राम सभा की प्रभावशीलता का सीधा संबंध है – “जन-जागरूकता, प्रशासनिक पारदर्शिता औरराजनीतिक ईमानदारी” से। प्रस्तोता: गोपाल प्रसाद (आरटीआई सेवक) राष्ट्रीय सह संयोजक भारत गठबंधन मकान नंबर – 12, प्रथम तल, चंदर विहार, निकट बालकनाथ मंदिर, आईपी एक्सटेंशन, दिल्ली – 110092 मो.- 9910341785,7678261884, Whatsapp: 8178949704 ई-मेल: sampoornkranti2025@gmail.com

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