साक्षात्कार: गोपाल प्रसाद खटीक (आरटीआई सेवक)
साक्षात्कार: गोपाल प्रसाद खटीक (आरटीआई सेवक)
खटीक समाज में जन्मे गोपाल प्रसाद सूचना का अधिकार(आरटीआई) के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बाद राजनीति में भी कदम बढ़ाया है जिससे एक आस जगी है। विपरीत परिस्थितियों से पार पाते हुए कई लोग जो सफलताएं हासिल की है, के कद को इन्होंने ऊंचा कर दिया है। इस क्रम में यह कहना गलत नहीं होगा कि गोपाल प्रसाद ध्रुमकेतु की तरह उभरे हैं। इनके जैसे युवा ने नया विश्वास,नया जोश और नई उम्मीदें भरते हुए देश और समाज को एक नया आयाम दिया है। ऐसे युवा भले ही ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की पात्रता न रखते हों,पर सूचना का अधिकार अभियान को शिखर पर ले जाने की ड्राइविंग सीट इन्होंने जरूर हासिल कर ली है। इस युवा का चमकदार प्रदर्शन यही दर्शाता है कि स्पर्धाओं में महज भागीदारी के लिए नहीं जाते बल्कि उनका लक्ष्य जीतना होता है। इनको हार बर्दाश्त नहीं होती। और उनकी बादशाहत कायम रखने की प्रबल इच्छा शक्ति भले भारतीय जगत की तस्वीर पेश करती है। ऐसे युवा ने यही दिखाया है कि अगर हौसले बुलंद हो तो आर्थिक तंगी में भी शिखर तक की दूरी तय की जा सकती है और यदि देश का मान बढ़ाने का जज्बा हो तो कोई भी मुश्किल उनके आड़े नहीं आ सकती। जरूरत है तराशे और तलाशे गए युवा कुछ सहेज कर न केवल रखा जाए बल्कि उन्हें भविष्य के चमकते सितारे के रूप में तैयार किया जाए। सच यही है कि उज्जवल भविष्य के लिए किए जा रहे निवेश के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। कई बार तो मैं सोच में पड़ गया है कि कहीं यह युवक पागल तो नहीं हो गया?जब उसने मुझे भारत के तमाम दिग्गजों को बिना किसी तनाव के जनहित के मुद्दों को पहुंचाने का काम दिखाया तो मुझे समझ में आया। यह महज दिखता ही नहीं है बल्कि लेखनी के माध्यम से तपस्या भी करता है। बेहद सौम्य,सरल,बेबाक और मृदुभाषी गोपाल प्रसाद का मानना है कि मैं इस तरह लीन रहता हूं कि खुद को प्रशिक्षण केंद्र और अपने कमरे तक सीमित कर रखा है। पूर्वी दिल्ली के मंडावली क्षेत्र में किराए के मकान में जहां ये रहते हैं वहाँ ज्यादातर लोगों को यह पहचानते तक नहीं है, जबकि मीडिया के कई दिग्गज उनके घर पर दस्तक दे चुके हैं।गोपाल प्रसाद को बिहार में पहले उनका साथ देने वाला कोई नहीं था पर अब वे सूचना का अधिकार का प्रशिक्षण शिविर भी चलाते हैं। इसके लिए देश के किसी भी कोने में वे जाने को तैयार रहते हैं। अपने इस अभियान में वे इतना लीन हैं कि उन्होंने अपनी नौकरी भी छोड़ दी। गोपाल प्रसाद का अपना पूरा समय आरटीआई मिशन के लिए समर्पित है। वर्ष 2010 तक किसी भी जन समस्या के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीयमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों, जिलाधिकारियों एवं संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को नियमित पत्र लिखते रहते थे पर उसका सकारात्मक जवाब उन्हें नहीं मिलता था, जिससे वे परेशान रहते थे।इसी बीच वर्ष 2010 में नृपेंद्र कालिया नामक व्यक्ति ने इनको "सूचना का अधिकार" नामक पुस्तक समीक्षा के लिए दिया था। उन्होंने यह पुस्तक रात भर में पूरी पढ़ डाली और तय किया कि अब वे आरटीआई के टूल का इस्तेमाल करेंगे। आरटीआई के माध्यम से जनहित से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहेंगे और हमेशा एक नया प्रश्न खड़ा करेंगे।
इनकी सबसे बड़ी खासियत सकारात्मक सोच के साथ अड़े रहना और भरपूर ऊर्जा के साथ लगातार सक्रिय रहने की क्षमता है। अपने क्षेत्र में उतरने के पहले वे प्रतिपक्ष की प्रतिष्ठा या उपलब्धियों से प्रभावित नहीं होते,सिर्फ अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं। गोपाल प्रसाद के लिए यह बहुत बड़ी बात लगती है कि उसने यह जो उपलब्धि हासिल की है उसे लोग ताउम्र हासिल नहीं कर पाते। मुझे इन पर काफी भरोसा और विश्वास है। अगर जीत की अदम्य इच्छाशक्ति हो तो किसी भी क्षेत्र में सफलता का झंडा गाड़ा जा सकता है। कभी भी चुनौतियों को स्वीकारने से पीछे नहीं हटना चाहिए। गोपाल प्रसाद का कहना है कि जब सफलता की ख्वाहिश आपको सोने ना दे। जब मेहनत के अलावा और कुछ अच्छा न लगे,जब लगातार काम करने के बाद थकावट ना हो, समझ लेना सफलता का नया इतिहास रचने वाला है। वाकई! इनका आज बताता है कि इन्हें शिखर छूने से रोक पाना आसान नहीं है। जिस तरह की चुनौती खुद इनके होते हैं,उसी तरह उन्होंने सफलताओं की सीढ़ी चढ़ते हुए अपने लिए मुकाम खुद तैयार कर रखा है। वे निरंतर अपने प्रदर्शन में सुधार करते जा रहे हैं। अब उनका एकमात्र लक्ष्य - "सूचना का अधिकार" को देश के हर भाग में जन-जन तक पहुंचाकर " संपूर्ण क्रांति" का शंखनाद करना है। उनका मानना है कि देश की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग अपने अधिकारों को अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्य को नहीं जानते एवं उसका प्रयोग करना नहीं जानते। ऐसी स्थिति में कोई भी बदलाव कैसे संभव है?अब उनका एकमात्र लक्ष्य अपने प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए कम से कम 1000 गोपाल प्रसाद RTI सेवक तैयार करना है। वे कहते हैं कि उनका ध्यान तकनीक व ताकत को बेहतर करने पर है क्योंकि यही एक माध्यम है जिसके द्वारा अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती है। सोशल मीडिया के माध्यम से वे देश और समाज के जन समस्याओं के प्रति काफी सजग रहते हैं और जन जागरण के प्रति काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
#पृष्ठभूमि : गोपाल प्रसाद बचपन में प्राथमिक शिक्षा वर्ग में हमेशा प्रथम आते थे। उनके पिता उन्हें विभिन्न स्थानों में घुमाने ले जाते थे। उनका झुकाव सत्संग, प्रवचन, स्वाध्याय कानून और इतिहास तथा समाज के कई अनछुए पहलुओं के प्रति जागृति पैदा कराना था। उनके पिता प्राइवेट ट्यूशन के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते थे पर उन्होंने अपने बच्चों में नैतिक शिक्षा और संस्कार दिया जिसके कारण गोपाल प्रसाद का झुकाव देश और समाज के प्रति बढ़ गया। 20 साल पहले वे दिल्ली आए। और दिल्ली के होकर रह गए परंतु कठोर परिश्रम के साथ-साथ देश और समाज के प्रति उनका चिंतन, मनन, और क्रियाशीलता बेजोड़ रहा। आर्थिक विपन्नता में भी वे स्वाभिमानी रहे और किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। "तेते पांव पसारिए, जेती लांबी ठौर" के मूल सिद्धांत पर यह चलते रहे। बेशक यह कछुआ चाल में चलते रहे पर मुझे आशा ही नहीं विश्वास है कि यह अपने लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे।
#प्रेरणा स्त्रोत: गोपाल प्रसाद के प्रेरणास्त्रोत उनके स्वर्गीय पिता वैद्यनाथ प्रसाद थे। कुछ अलग,कुछ विशेष और कुछ प्रभावी करने की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण वे दिल्ली आए और मेरा ध्यान भंग नहीं होने दिया। गोपाल प्रसाद ने मुझे सपना पूरा करने की ओर बढ़ाएं रखा। गोपाल प्रसाद कहते हैं कि मेरे परिवार ने काफी प्रयास किए और अब इन सब का फल मिल गया। कठिन परिस्थिति में भी देश और समाज का सपना पालना आसान नहीं होता। तमाम तनावों के बीच ना केवल पिता का एक बड़ा सपना पाला बल्कि कड़ी मेहनत और निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति के साथ उसे पूरा करके देश के जागरूक नागरिकों के सामने एक अविस्मरणीय उदाहरण भी पेश किया है। वे यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि अगर आप शीर्ष पर आने को प्रेरित हो तो उसे हासिल करने से आपको कोई नहीं रोक सकता। महत्वाकांक्षी गोपाल प्रसाद का एक सपना था कि जिसे वे अखबार में पढ़ते हैं टीवी पर देखते हैं क्या उनके साथ जुड़ा जा सकता है? क्या उनका सानिध्य प्राप्त हो सकता है? उन्होंने सोचा ही नहीं बल्कि कर दिखाया। गोपाल प्रसाद हमारे समाज के एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो सत्ताधारी भाजपा के दो पूर्व राष्ट्रीय महासचिव संजय जोशी एवं के एन गोविंदाचार्य के निकटतम सहयोगियों में से रहे। वर्ष 2014 में अमेठी (उत्तरप्रदेश) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा और फिर प्रथम वर्ष प्रशिक्षण हेतु गोरखपुर गए। वर्ष 2014 में अमेठी से भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ना चाहा पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार। के दबाव पर वे चुनाव नहीं लड़े। पर उनको उन्होंने कहा वे इस बार तो आपकी बात मान रहे हैं पर 2019 में उनकी बात नहीं मानेंगे और अमेठी से लोकसभा चुनाव अवश्य लड़ेंगे। जिद और जुनून के पक्के गोपाल प्रसाद अमेठी लोकसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़े! और 3177 वोट प्राप्त किए। सीमित सुविधा और संसाधन के कारण बेशक उन्हें मात्र 3177 वोट ही मिले पर देखा जाए तो राहुल गांधी को अमेठी से हरवाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। ध्यान देने योग्य यह भी बात है कि अमेठी की 3177जागृत जनता ने स्मृति ईरानी और राहुल गांधी को छोड़कर गोपाल प्रसाद को चुना। यह कम बड़ी बात नहीं। ये बिहार में जन्में दिल्ली में रहते हैं पर चुनाव अमेठी से लड़े और राहुल को अमेठी से भगाने में मुख्य भूमिका निभाई।
# मूल मंत्र: इनका मूल मंत्र है" जब नाव जल में छोड़ दी, तो धार क्या मझधार क्या? अपने राजनीतिक गुरु श्री केएन गोविंदाचार्य से उन्होंने एक मूल मंत्र प्राप्त किया - संपर्क, समन्वय, संवाद और सहयोग। यही एक ऐसा मूलमंत्र है जिसके माध्यम से जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता अर्जित की जा सकती है। अपने दूसरे राजनीतिक गुरु संजय जोशी से भी वे काफी प्रभावित हैं। उनका कहना है क्या कोई राजनीतिक व्यक्ति जमीन पर सो सकता है?ऐसा बिरला व्यक्तित्व जिसमें सादगी,विषय के प्रति चिंतन, मनन, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, घमंड और अहंकार के बजाए अपनत्व भाव दूसरे नेताओं से उन्हें अलग करता है। गोपाल प्रसाद ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में इन दोनों नेताओं का काफी प्रभाव है। वे मानते हैं कि जयप्रकाश नारायण के गुजर जाने के बाद संपूर्ण क्रांतिनहीं मर गई बल्कि "सूचना का अधिकार" क्रांति के रूप में आज भी जीवित है। जरूरत है उसे समग्र क्रांति का रूप देने की। उनका मानना है कि जीवन में जितना महत्वपूर्ण आक्रामक शैली का होना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण रक्षात्मक शैलीभी है। इसलिए दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है। हमें कठिनाइयों के बीच संतुलन बनाते रहना चाहिए और प्राथमिकता तय करने में सावधानी बरतनी चाहिए तभी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
#प्रेरणा: जिन्होंने न केवल उनको संकट के दौर से उबरने में मानसिक तौर पर मदद की उनका कर्ज वे जीवन भर नहीं चुका सकते। गोपाल प्रसाद ने अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया। कई मानसिक प्रताड़ना की यादें छाई हुई थी पर अपने ऊपर लगे आरोपों को एक झटके में झूठा साबित कर दिया।
#करारा झटका: एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले गोपाल प्रसाद के लिए उनके पिता की मृत्यु सबसे बड़ा सदमा था। दूसरा झटका उन्हें तब लगा जब उनके छोटी बहनके पति की असामयिक मृत्यु दिल्ली में हो गई।(जिसकी शादी मामचंद रिवाड़िया ने राजौरी गार्डन स्थित अपने कार्यालय से ही किया था) अब एक तरफ उन्हें अपने मातृभूमि की चिंता सताती थी वहीं दूसरी ओर दिल्ली में अपने बहनोई की मृत्यु की चिंता सता रही थी। वास्तव में अपने बहन के बच्चों के भविष्य के प्रति काफी चिंतित रहते थे। गोपाल प्रसाद ने अपनी बहन को स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। आज उनकी बहन दिल्ली के निहाल विहार (राव विहार) इलाके में प्राइवेट नौकरी करके अपने परिवार की आजीविका चलाती है। गोपाल प्रसाद खुद कहते हैं कि जब मैं दिल्ली आया था तो काफी अभाव में थे, अब वे 5 लोगों के परिवार का भरण- पोषण विगत 20 सालों से दिल्ली में रहकर कर रहे हैं। इस बार दिल्ली के पटपड़गंज विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे पर उन्हें और संतोषजनक सफलता मिली क्योंकि उस वक्त वे बीमार हो गए थे! हिंदी कंटेंट राइटिंग एवं सोशल मीडिया मार्केटिंग में दक्ष गोपाल प्रसाद ने एक नई कंसल्टेंसी कंपनी "अनलॉक कम्यूनिकेशन प्रा.लि." की आधारशिला स्वजाति अधिवक्ता चतुर सिंह वाजना के सहयोग से रखी है।इनका कार्यालय मधु विहार मार्केट आईपी एक्सटेंशन में है। मुझे इनसे काफी आशाएं हैं।आपलोगों से मैं निवेदन करता हूं कि ऐसे प्रतिभावान समाज के युवा की योग्यता,प्रतिभा का लाभ समाजहित और देशहित में अवश्य लें जिसके लिए वे स्वयं तत्पर रहते हैं।
निवेदक : मामचंद रिवाड़िया
आत्मकथा लेखक :"मेरा जीवन दर्शन"
पता: एसी-23,टैगोर गार्डन,
नई दिल्ली-110027.
मो.:9212003162,9312405580
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